HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: रसेल वाइपर के बच्चे का हल्का डंक, महिला ICU में !

अल्मोड़ा: रसेल वाइपर के बच्चे का हल्का डंक, महिला ICU में !

आवासीय परिसर में सांप ने दिए बच्चे

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में एक बेहद जहरीले रसेल वाइपर (Russell’s Viper) के बच्चे के हल्के से डसने के बाद एक महिला की हालत गंभीर हो गई। महिला को आनन-फानन में बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। गनीमत रही कि सांप की समय रहते पहचान हो गई और महिला को तत्काल उचित उपचार मिल सका। अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

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घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जहरीले सांप के काटने को मामूली समझना कितना खतरनाक हो सकता है। हैरानी की बात यह रही कि महिला को सांप ने उंगली में केवल हल्का सा काटा था और उन्हें शुरुआत में सिर्फ सुई चुभने जैसा दर्द महसूस हुआ। इसके बावजूद कुछ ही समय में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

पार्षद अमित साह ‘मोनू’ के अनुसार, बृहस्पतिवार को रोडवेज स्टेशन, लोअर माल रोड के पास स्थित एक आवासीय परिसर में घर के भीतर एक सांप ने बच्चे दिए। परिवार के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने सावधानी बरतते हुए सांप के एक छोटे बच्चे को पकड़कर बोतल में बंद कर दिया।

इसके बाद परिवार को लगा कि अब खतरा टल गया है। लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे परिवार को सकते में डाल दिया।

हल्दी निकालने के लिए थैली में डाला हाथ, सांप के बच्चे ने डस लिया

बताया गया कि महिला एक थैली में रखी हल्दी निकालने के लिए जब उसमें हाथ डाल रही थीं, तभी वहां मौजूद सांप के दूसरे बच्चे ने उनकी उंगली में हल्का सा काट लिया।

महिला को उस समय कोई बड़ा दर्द नहीं हुआ। उन्हें केवल सुई चुभने जैसा महसूस हुआ और शुरुआत में मामला सामान्य ही लगा। लेकिन कुछ समय बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी और सांप के जहर का असर सामने आने लगा।

परिजनों में घबराहट फैल गई और तत्काल मदद के लिए संपर्क किया गया।

पार्षद ने वन विभाग को दी सूचना, टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

मामले की सूचना पार्षद अमित साह ‘मोनू’ को मिली तो उन्होंने तत्काल वन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घर में मौजूद सांप के बच्चे का सुरक्षित रेस्क्यू किया।

बाद में सांप को सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया। इस दौरान परिवार के लोगों को भी राहत मिली कि घर के भीतर मौजूद जहरीले सांप का खतरा टल गया है।

सांप पकड़ने के अनुभव ने बचाई बड़ी मुसीबत

अमित साह ‘मोनू’ स्वयं लंबे समय से सांपों को पकड़ने और उनके रेस्क्यू का कार्य करते रहे हैं। उन्होंने सांप के बच्चे को देखते ही पहचान लिया कि यह रसेल वाइपर जैसी बेहद जहरीली प्रजाति का बच्चा है।

सांप की सही पहचान इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। अमित साह ने चिकित्सकों को भी सांप दिखाया, जिससे चिकित्सकों को महिला के उपचार में महत्वपूर्ण जानकारी मिली और उन्हें समय रहते आवश्यक उपचार दिया जा सका।

समय पर अस्पताल पहुंचना रहा निर्णायक

सांप के काटने के बाद महिला की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल बेस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। समय पर अस्पताल पहुंचने, सांप की सही पहचान होने और उसके अनुरूप उपचार मिलने से महिला की स्थिति में सुधार आया।

फिलहाल महिला खतरे से बाहर बताई जा रही हैं।

जहरीले सांप के काटने को हल्के में न लें

इस घटना ने यह भी संदेश दिया है कि सांप के काटने के बाद भले ही दर्द या सूजन जैसे लक्षण बेहद मामूली दिखाई दें, लेकिन स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब सांप जहरीला होने की आशंका हो, तो पीड़ित को तत्काल अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है।

अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र में बरसात के मौसम में सांपों के घरों और आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। सांप या उसके बच्चे दिखाई देने पर उन्हें खुद पकड़ने अथवा छेड़ने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना ही सुरक्षित कदम है।

समय पर पहचान, तत्काल रेस्क्यू और शीघ्र उपचार—इन्हीं तीन वजहों से इस मामले में एक बड़ी अनहोनी टल गई।

रसेल वाइपर (Russell's Viper
रसेल वाइपर (Russell’s Viper)

रसेल वाइपर कितना खतरनाक !

रसेल वाइपर (Russell’s Viper) भारत का सबसे खतरनाक और जानलेवा सांप माना जाता है, जो देश में सांप के काटने से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार है.

यह सांप इतना खतरनाक क्यों है?

बिजली जैसी फुर्ती: यह बेहद सुस्त दिखता है, लेकिन हमला करते समय यह एक सेकंड के चौथे हिस्से (0.25 सेकंड) से भी तेज गति से झपट्टा मारता है.सबसे बड़े दांत: भारत में पाए जाने वाले जहरीले सांपों में इसके जहरीले दांत सबसे (लगभग 16mm तक) और सुई जैसे नुकीले होते हैं, जो शरीर में गहराई तक जहर पहुंचा देते हैं.

प्रेशर कुकर जैसी फुफकार: खतरा महसूस होने पर यह कुंडली मारकर बैठ जाता है और प्रेशर कुकर की सीटी जैसी बहुत तेज आवाज में फुफकारता है.

घातक मात्रा: इसकी सिर्फ एक बूंद जहर से 20 से अधिक लोगों की जान जा सकती है. इसके काटने पर तुरंत [एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) का इंजेक्शन ही एकमात्र इलाज है. किसी भी झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खे के चक्कर में पड़ना मौत को बुलावा देना है.

रसेल वाइपर सांप के छोटे बच्चे का काटा जाना भी खतरनाक होता है ?

हाँ, रसेल वाइपर के छोटे बच्चे (Juvenile/Baby) का काटना भी उतना ही खतरनाक और जानलेवा होता है जितना कि एक वयस्क (Adult) सांप का काटना. कई वैज्ञानिक शोधों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसके बच्चे जन्म से ही पूरी तरह सक्रिय जहर के साथ पैदा होते हैं.छोटे रसेल वाइपर का काटना निम्नलिखित कारणों से और भी अधिक घातक साबित हो सकता है:

  1. जहर पर नियंत्रण न होना (Poor Venom Control) : एक बड़ा सांप अक्सर शिकार की स्थिति देखकर सीमित मात्रा में जहर छोड़ता है (कई बार वह बिना जहर का ‘ड्राई बाइट’ भी करता है). इसके विपरीत, छोटे बच्चे को अपने जहर की ग्रंथियों पर नियंत्रण नहीं होता है. खतरा महसूस होने पर वे अक्सर अपनी क्षमता का पूरा जहर (Full Dose) एक ही बार में इंसान के शरीर में डाल देते हैं.
  2. अधिक विषैला जहर (High Venom Potency) : वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि रसेल वाइपर के बच्चों का जहर स्तनधारियों (जैसे इंसान और चूहे) के लिए वयस्क सांपों के मुकाबले और भी अधिक घातक और असरदार हो सकता है. इसका कारण उनका शुरुआती आहार (छोटे छिपकली आदि) होता है, जिसके लिए उनके शरीर में अत्यधिक तीव्र जहर बनता है.
  3. मारने के लिए पर्याप्त मात्रा: इंसान की जान लेने के लिए रसेल वाइपर का सिर्फ 40 से 70 मिलीग्राम जहर ही काफी होता है. रसेल वाइपर के बच्चे एक बार में औसतन 8 से 79 मिलीग्राम तक जहर छोड़ सकते हैं, जो किसी भी वयस्क इंसान या बच्चे को मौत की नींद सुलाने के लिए पर्याप्त है.
  4. पहचान की भूल: लोग अक्सर छोटे सांप को ‘बिना जहर का केचुआ या सपोला’ समझकर उसे हाथ से पकड़ने या नजरअंदाज करने की गलती कर बैठते हैं. रसेल वाइपर के बच्चे अंडे नहीं देते, बल्कि मादा एक बार में सीधे 40 से 60 जहरीले बच्चों को जन्म देती है, जिससे किसी एक इलाके में इनकी संख्या अचानक बढ़ सकती है.
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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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