ईमानदारी की मिसाल: वन कर्मियों ने लौटाया ₹60 हजार का सोने का झुमका

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ईमानदारी की मिसाल: वन कर्मियों ने लौटाया ₹60 हजार का सोने का झुमका
ईमानदारी की मिसाल: वन कर्मियों ने लौटाया ₹60 हजार का सोने का झुमका

रामगढ़।: वर्तमान दौर में जहाँ भौतिकवाद हावी है, वहीं उत्तरी गौला रेंज के वन कर्मियों ने ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। जंगल से मिले 60 हजार रुपए कीमत के सोने के झुमके को पूरी शुचिता के साथ उसके असली मालिक तक पहुँचाकर कर्मचारियों ने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।


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क्या था पूरा मामला?

मंगलवार शाम उत्तरी गौला वन क्षेत्र के कर्मचारी पंकज सिंह रैक्वाल और कुन्दन कुमार फायर ड्रिल पूरी कर रेंज कार्यालय लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें रास्ते में सोने का एक झुमका गिरा हुआ मिला।

  • तत्काल सूचना: दोनों कर्मचारियों ने बिना देर किए इसकी जानकारी वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट को दी।
  • सोशल मीडिया का सहारा: विजय भट्ट के निर्देश पर ईमानदारी का परिचय देते हुए इस सूचना को स्थानीय सोशल मीडिया ग्रुप्स और प्रतिनिधि सुरेश नेगी के माध्यम से प्रसारित किया गया ताकि असली मालिक का पता चल सके।

पहचान और वापसी

सोशल मीडिया पर खबर फैलते ही इसका असर देखने को मिला। बुधवार सुबह भियालगांव की प्रधान चंदुलता अपने दूसरे कान का झुमका लेकर रेंज कार्यालय पहुँचीं।

  1. मिलान: कार्यालय में रखे झुमके और प्रधान द्वारा लाए गए झुमके का मिलान किया गया।
  2. समानता: दोनों आभूषण पूरी तरह एक जैसे पाए गए।
  3. सुपुर्दगी: पुष्टि होने के बाद वन विभाग की टीम ने ससम्मान वह कीमती झुमका चंदुलता देवी को सौंप दिया।

“आज के समय में इतनी कीमती वस्तु का सुरक्षित वापस मिलना सुखद आश्चर्य है। वन विभाग के कर्मचारियों की ईमानदारी ने मेरा विश्वास जीत लिया।” — चंदुलता देवी, ग्राम प्रधान (भियालगांव)


मिला नकद पुरस्कार

वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट ने पंकज सिंह रैक्वाल और कुन्दन कुमार की इस कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी पर गर्व जताते हुए उन्हें 1,000 रुपए का नकद पारितोषिक प्रदान किया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के लोग वन विभाग के इन सजग प्रहरियों की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं।

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