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बागेश्वर ब्रेकिंग: असों से कुंदन राम जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित

➤ तीन जीवित जैविक संतान होने का तथ्य छुपाने पर हुई कार्रवाई

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सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर: उत्तराखण्ड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 के प्रावधानों के तहत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 असों जिला पंचायत सीट से निर्वाचित कुन्दन राम को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी आरसी तिवारी ने शनिवार को संबंधित आदेश जारी किया।
क्या था पूरा मामला

दरअसल, तत्कालीन कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवत डसीला ने शिकायत की थी, जिसके आधार पर संज्ञान में आया कि निर्वाचन प्रक्रिया में तथ्य छिपाए गए हैं। शिकायत थी कि कुन्दन राम ने निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान अपनी तीसरी जीवित जैविक संतान के संबंध में तथ्य छिपाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखण्ड के निर्देशानुसार जांच शुरू हुई।सीडीओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें परियोजना निदेशक (डीआरडीए), जिला पंचायतराज अधिकारी तथा खण्ड विकास अधिकारी को शामिल किया।
ऐसे हुई पूरी पड़ताल

जांच समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण पंजिकाओं, टेक होम राशन (टीएचआर) अभिलेखों, गोदनामा दस्तावेजों एवं अन्य उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया। जांच के दौरान उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों से यह तथ्य सामने आया कि कुन्दन राम की तीन जीवित जैविक संतानें हैं। जांच में यह भी पाया गया कि 06 सितम्बर 2025 को पंजीकृत गोदनामे में स्वयं कुन्दन राम ने तीन जीवित जैविक संतानें होने का उल्लेख किया गया था। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में भी तीसरी संतान के जन्म एवं उसके पोषण संबंधी विवरण दर्ज पाए गए। जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर कुन्दन राम ने भी लिखित रूप से तीसरी संतान के जन्म की पुष्टि की।
शिकायत सच साबित होने पर हुए अयोग्य

उत्तराखण्ड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा-90(1)(द) के अनुसार दो से अधिक जीवित जैविक संतान वाले व्यक्ति को जिला पंचायत सदस्य पद हेतु अयोग्य माना गया है। इसी आधार पर संबंधित शिकायत की पुष्टि होने के बाद विहित प्राधिकारी ने कुन्दन राम को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्णय से पूर्व संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूर्ण मौका प्रदान किया गया तथा सभी तथ्यों एवं अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण किया गया। संपूर्ण कार्यवाही विधिसम्मत एवं नियमानुसार संपन्न की गई। यह भी कहा गया है कि आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष को पत्र प्राप्ति की तिथि से 15 दिवस के भीतर मण्डलायुक्त, कुमाऊँ मण्डल के समक्ष अपील प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है।

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