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आपदा ने कर दिया बर्बाद, गांव—गांव तबाही का मंजर, कोई तो पूछ ले हाल

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  • क्षतिग्रस्त मकान, ढह चुकी दीवारें, उफनाए गाढ़—गधेरे, बर्बाद हो गये खेत

सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी/गरमपानी

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उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में अतिवृष्टि का दौर भले ही थम गया है, लेकिन अल्मोड़ा व नैनीताल जनपद के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित आज क्षतिग्रस्त मकान, ढह चुकी दीवारें, उफनाए गाढ़—गधेरे, बर्बाद हो गये खेत आपदा की कहानी कह रहे हैं। आपदा में बहुत सी जानें तो गई हैं, लेकिन मकान, खेत—खलिहान, दुकानें, पेयजल व विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त होने से हुए नुकसान से जन सामान्य उभर ही नहीं पा रहा है।

कई आपदा प्रभावितों को सहायता राशि मिली है, लेकिन अधिकांश तो ऐसे हैं, जिन्हें शासन—प्रशासन स्तर पर मदद मिलना तो दूर कोई सरकारी नुमाइंदा उनके गांव में क्षति का निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचा है। इन हालातों कुछ लोग जहां प्रशासन को कोस रहे हैं, वहीं बहुत से गांवों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्वयं श्रमदान करके क्षतिग्रस्त मार्गों व पेयजल लाइनों का दुरूस्त करना शुरू कर दिया है।

विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। ग्राम छोड़ी धूरा के रहने वाले लक्ष्मण सिंह पुत्र जगत सिंह की एनएच पर राशन की दुकान चलाते हैं। उनकी दुकान के भीतर पानी आने से सारा राशन खराब हो चुका है। जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति पहुंची है। देव सिंह व गौर सिंह ने बताया कि उनका मकान क्षतिग्रस्त हो चुका है, लेकिन आज तक कोई मुआवजा उन्हें नहीं मिल पाया है। पूर्व प्रधान रूप सिंह गौड़ा का भी मकान इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुआ है। विशन सिंह का मकान भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है। सभी प्रभावितों ने दै​वीय आपदा मद के तहत राहत राशि की मांग की है।

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ढोकाने वाटर फाल में लगी पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो जान से ग्राम सिरसा चौनीखेत के रहने वाले अनूप सिंह जीना और नवीन जीना का परिवार पीने के पानी के लिए मोहताज हो गया है। उनकी पूरी पेयजल लाइन ध्वस्त हो गई है। क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन को आज तक दुरूस्त नहीं किया जा सका है। वहीं भगवत भंडारी का स्नानागृह व शौचालय की दीवार व मकान की दीवार में दरारें पड़ चुकी हैं। समस्त प्रभावितों ने प्रशासन से मुआवजा राशि की मांग की है। अनूप सिंह जीना का एनएच के करीब मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया है व जगह—जगह दरारें पड़ चुकी हैं।

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उधर हली हरतबा व बेतालघाट अंतर्गत तमाम प्रमुख मार्ग टूट चुके हैं। खेत व मकान, आंगन, शौचालय आदि सभी ध्वस्त हो चुके हैं। ग्रामीण जिला प्रशासन से मुआवजा राशि की मांग कर रहे हैं।

ग्राम सिरसा, चोपड़ा, कमोली, मोना, क्वाराब, दियारी, सिमायल, ल्वेसाल में भी सभी जगह खेत—खलिहान बह गये हैं। वहीं मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मौके पर पहुंच कर वस्तुस्थिति का जायजा लेने की मांग की है, ताकि आर्थिक क्षति पर उन्हें राहत राशि मिल सके।

उधर बेतालघाट ब्लॉक के धारी, लोहाली में आपदा से जबरदस्त नुकसान हुआ है। यहां 75 प्रतिशत आबादी अतिवृष्टि से आई आपदा से प्रभावित हुई है। तीन—चार मकान मलबे में दब चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई भी नुमाइंदा आज तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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