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जवानी में जुर्म, बुढ़ापे में गिरफ्तारी, दुकान चलाता मिला 37 साल से फरार डकैत

News Insight : कई बार जवानी में की गई गलती की सजा बढ़ापे में मिलती है। ऐसा ही कुछ बिजनौर के रहने वाले एक शख्श के साथ हुआ है। जिसने 25 साल की उम्र में डकैती डाली। पकड़ा गया और जेल गया, लेकिन जमानत मिलने के बाद फरार हो गया। पूरे 37 साल बाद वह दिल्ली से तब पकड़ा गया जब उसकी उम्र 72 साल हो चुकी है और गलत धंधे छोड़ वह शांतिपूर्ण ढंग से परचून की दुकान चला अपना जीवन यापन कर रहा था। जवानी में जुर्म करने वाले शख्श की बुढ़ापे में गिरफ्तारी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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जवानी में जुर्म, बुढ़ापे में गिरफ्तारी : बिजनौर पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
जवानी में जुर्म, बुढ़ापे में गिरफ्तारी : बिजनौर पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

News Details : यह पूरा मामाला उत्तर प्रदेश के बिजनौर का है। जवानी में गलत संगत में पड़ गया था और डकैती के एक मामले में गिरफ्तार हुआ। कोर्ट से उसे सजा मिली, लेकिन जमानत पर जेल से बाहर आ गया। तब उसकी उम्र महज 25 साल थी। फिर साल 1986 में वह अचानक घर से फरार हो गया। इस बीच जनपद के 58 पुलिस अधीक्षक, 45 से ज्यादा थानेदार बदल गए, लेकिन कहीं उसका पता नहीं चला। इस बीच अचानक उसे दिल्ली से 72 साल की उम्र में गिरफ्तार कर लिया गया। जहां वह परचून की दुकान चला रहा था।

कौन है यह आरोपी और इसका आपराधिक रिकार्ड !

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार बिजनौर के नगीना देहात थाने अंतर्गत गांव सैदपीर (बनीवाला) का रहने वाला हाशिम अपने जमाने का एक नामी बदमाश रहा रहा है। साल 1975 से लेकर 1980 के बीच उसने लूट, डकैती, अपहरण जैसी कई घटनाओं को अंजाम दिया। जिस कारण वहनजीबाबाद थाने से उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया था।

हिस्ट्रीशीटर हाशिम ने बढ़ापुर के ग्राम आसफपुर में 1979 में एक घर में डकैती डाली थी। बाद में पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब सीजेएम कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया और 7 साल की सजा सुनाई। सजा के विरुद्ध हाशिम ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई। जिसका लाभ उठाते हुए वह साल 1986 में जेल से बाहर आया और भाग गया।

कोर्ट ने कई बार जारी किया गैर जमानती वारंट

फारारी के बाद कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ कई बार गैर जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन वह हमेशा बच जाता था। बताया जा रहा है कि एक तरफ पुलिस उसकी तलाश में लगी थी, वहीं बेहद शातिर हाशिम ने चोरी-छुपे अपनी सारी संपत्ति भी बेच दी। पुलिस द्वारा वह भगोड़ा घोषित था।

दिल्ली में परचून की दुकान चलाता मिला

बताया जा रहा है कि बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंचने पर इस व्यक्ति ने जुर्म की दुनिया से नाता तोड़ डाला था। वह दिल्ली के मुस्तफाबाद में परचून की दुकान चला रहा था। पूरे 37 साल बाद पुलिस अचानक उसको ढूंढते वहां पहुंच गई और वह गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार
हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा हाशिम का स्थाई वारंट जारी हुआ था। बिजनौर पुलिस को आदेशित किया गया कि हाशिम को पकड़कर कोर्ट में पेश करें।

पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन की बड़ी उपलब्धि

जिसे अपराधी को 58 एसपी नहीं ढूंढ पाये उसे वर्तमान एसपी नीरज जादौन ने गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। एसपी द्वारा थाना अध्यक्ष नगीना देहात को हाशिम को पकड़ने का टास्क सौंपा गया था। इस बीच सभी मुखबिर ​सक्रिय कर दिए गए। पता चला कि हाशिम बिजनौर से फरार होने के बाद से अपने एक भाई के फोन द्वारा संपर्क में है। जो पुलिस के लिए बड़ी लीड थी। पुलिस को ​हाशिम का पता चला और टीम दिल्ली रवाना हो गई। जहां मुस्तफाबाद से उसे दबोच लिया गया। फिलहाल उसे कोर्ट में पेश कर दिया गया है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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