अल्मोड़ा। देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य का नया विधानसभा भवन बनाये जाने पर उत्तराखण्ड लोक वाहिनी ने सख्त आप दर्ज करते हुए प्रदेश सरकार पर उत्तराखंड के शहीदों और आंदोलनकारियों के बलिदान को शर्मसार किया करने का आरोप लगाया है।
सामाजिक दूरी का पालन करते हुए यहां हुई उलोवा की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जब सरकार गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन राजधानी घोषित कर चुकी है तो अघोषित राजधानी में विधानसभा भवन बनाने का क्या औचित्य है। गैरसैंण पर्वतीय राज्य की अवधारणा का केन्द्र है अत: गैरसैंण में ही राजधानी के विकास को महत्व दिया जाना चाहिये। उन्होने कहा कि सत्ताधारी व विपक्ष की पार्टियों को इसमें अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए।उन्होंने सवाल किया कि छोटे से प्रदेश मे दो-दो राजधानियों का क्या औचित्य है। बैठक में चितई स्थित प्रसिद्ध गोलजू मंदिर में मंदिर प्रबंध समिति (ट्रस्ट) का गठन किए जाने को भी स्वागत योग्य कदम बताया गया। बैठक की अध्यक्षता जगत रौतेला व संचालन पूरन चन्द्र तिवारी ने किया। बैठक मे जंग बहादुर थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, अजयमित्र सिंह बिष्ट, माधुरी मेहता, कुणाल तिवारी, शमशेर जंग गुरंग, रेवती बिष्ट, अजय मेहता, सूरज टम्टा, अनीस उद्दीन आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर समाजिक कार्यकर्ता मनीष सुन्दरियाल के पिता विजय सुंदरियाल की मृत्यु पर शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।
देहरादून में नया विधानसभा भवन बनाया जाना उत्तराखंड के शहीदों का अपमान, उलोवा ने जताई आपत्ति
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