कमतोली विद्यालय के छात्रों ने शुरू किया नवाचारी कृषि-बागवानी प्रोजेक्ट
वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ दे रहे मार्गदर्शन
CNE REPORTER, पिथौरागढ़। जनपद पिथौरागढ़ के विकासखंड कनालीछीना की मुवानी घाटी में अब स्कूली बच्चे खेती-बागवानी की नई संभावनाओं को तलाशने में जुटे हैं। राजकीय जूनियर हाईस्कूल कमतोली में कृषि एवं बागवानी को केंद्र में रखकर एक नवाचारी प्रायोगिक परियोजना शुरू की गई है। खास बात यह है कि इस परियोजना में बच्चे स्वयं प्रयोग कर रहे हैं, संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं और उन्हें विषय विशेषज्ञों तथा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिल रहा है। विद्यालय का यह प्रयास शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर स्थानीय परिस्थितियों, आजीविका और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापक लीला धामी के संयोजन में संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कक्षा आठ के बाल वैज्ञानिक पियूष कुमार और गुड्डी भट्ट प्रमुख रूप से अध्ययन एवं प्रयोग कर रहे हैं। इनके सहयोग के लिए सुनीता, मनीषा और अंशु भी परियोजना से जुड़े हैं। बच्चों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि स्थानीय जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों में एक ऐसे फल की उत्पादन क्षमता का अध्ययन करना है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग और कीमत है।

परियोजना के निर्देशक एवं विज्ञान शिक्षक डॉ. सीबी जोशी के अनुसार विद्यालय में पढ़ाए जाने वाले विज्ञान विषय को वास्तविक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यालय परिसर में बटर फ्रूट (एवोकाडो) के पौधे रोपित किए गए हैं। बाल वैज्ञानिक इन पौधों की वृद्धि, स्थानीय वातावरण में अनुकूलन, देखभाल तथा भविष्य में फल उत्पादन की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक सोच, अवलोकन, प्रयोग, आंकड़ों के संकलन और निष्कर्ष निकालने जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
वैज्ञानिकों का मिल रहा निरंतर मार्गदर्शन
परियोजना को वैज्ञानिक आधार देने में विशेषज्ञ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रक्षा कृषि अनुसंधान संगठन, डिबेर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. हेमंत कुमार पाण्डेय एवं डॉ. वंदना पाण्डेय समय-समय पर विद्यालय पहुंचकर परियोजना से जुड़े बच्चों और शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। वहीं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. टीएस सिरौला भी बाल वैज्ञानिकों को पौधों एवं वनस्पति विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए उनके प्रयोग को दिशा प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बच्चे यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या मुवानी घाटी की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां एवोकाडो उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। इसके लिए पौधों के विकास और स्थानीय परिस्थितियों में उनके व्यवहार को लगातार देखा और दर्ज किया जा रहा है।
स्थानीय जलवायु में एवोकाडो की उम्मीद
विज्ञान शिक्षक डॉ. जोशी बताते हैं कि कमतोली और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही आम, अमरूद और केला जैसे फलों का उत्पादन होता है। क्षेत्र की उपोष्ण जलवायु को देखते हुए यहां बटर फ्रूट यानी एवोकाडो के उत्पादन की भी अच्छी संभावना दिखाई देती है। यदि स्थानीय परिस्थितियों में इसका उत्पादन सफल रहता है तो यह क्षेत्र के किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकता है।
एवोकाडो की बाजार में अच्छी मांग और अपेक्षाकृत बेहतर कीमत होने के कारण इसके व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। ऐसे में विद्यालय का यह प्रयोग भविष्य में केवल एक शैक्षिक परियोजना तक सीमित न रहकर क्षेत्र की आजीविका और उद्यमिता से भी जुड़ सकता है।
किताबों से निकलकर धरातल पर उतरा विज्ञान
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें बच्चों को विज्ञान केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है। पौधे लगाना, उनके विकास का निरीक्षण करना, पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझना, समस्याओं की पहचान करना और विशेषज्ञों से समाधान जानना—ये सभी गतिविधियां बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हैं।
जिला विज्ञान समन्वयक डॉ. विकास पंत तथा ब्लॉक विज्ञान समन्वयक विंदेश्वरी ने कक्षा आठ में पढ़ाए जाने वाले विज्ञान के विभिन्न संकल्पनाओं को धरातल पर उतारने तथा वैज्ञानिक कौशल विकसित करने के लिए किए जा रहे इस प्रोजेक्ट की सराहना की है। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों एवं बाल वैज्ञानिकों के इस प्रयास को नवाचार और प्रयोग आधारित शिक्षा की दिशा में उपयोगी कदम बताया।
ग्रामीण बच्चों के लिए नई राह खोल सकता है प्रयोग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी विद्यालय की इस पहल का स्वागत किया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य हेमा भट्ट, ग्राम प्रधान नीतू भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम नारायण भट्ट, उषा देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने परियोजना में शामिल शिक्षकों और बाल वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों का यह प्रयोग सफल होता है तो इससे क्षेत्र में पारंपरिक फल उत्पादन के साथ नई बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की राह खुल सकती है। इससे आने वाली पीढ़ी में खेती-बागवानी के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं।
कमतोली विद्यालय का यह प्रयोग इसलिए भी उल्लेखनीय है कि यहां बच्चों को भविष्य की संभावनाओं का केवल सपना दिखाया नहीं जा रहा, बल्कि उन्हें प्रयोग, अनुसंधान और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के माध्यम से स्वयं संभावनाएं खोजने का अवसर दिया जा रहा है। मुवानी घाटी की धरती पर लगाए गए ये छोटे-छोटे एवोकाडो के पौधे आने वाले समय में यदि फल देने लगते हैं तो यह प्रयोग न केवल विद्यालय की उपलब्धि होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की बागवानी के लिए एक नई दिशा का संकेत भी बन सकता है।



