बालिका की हिम्मत और सूझबूझ से बची जान
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। एक बेहद चौंकाने और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ ग्राम सभा सिरसा के चोनीखेत क्षेत्र में एक गुलदार ने घर के आंगन के पास बैठी एक बालिका पर घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। लेकिन इस खौफनाक मंजर के बीच जो हुआ, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है।

गुलदार के बिल्कुल करीब आने के बावजूद 23 वर्षीय बालिका मिताली जीना (ममता) ने गजब की सूझबूझ, हिम्मत और बहादुरी का परिचय दिया। मौत को सामने देखकर भी वह घबराई नहीं, बल्कि जोर-जोर से चिल्लाते हुए आदमखोर गुलदार पर पत्थरों की बरसात कर दी। बालिका के इस अप्रत्याशित और आक्रामक रूप से खूंखार गुलदार भी सहम गया और उसने अपनी दिशा बदल दी। हालांकि, जाते-जाते गुलदार पास में ही बंधी एक बकरी को अपना निवाला बनाकर जंगल की ओर फरार हो गया। यदि बालिका ने पलक झपकते ही यह साहसिक कदम न उठाया होता, तो आज क्षेत्र में बड़ी जनहानि हो सकती थी।

सुबह 9:30 बजे की घटना: जब दिनदहाड़े आबादी में घुसा गुलदार
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना आज सुबह करीब 9:30 बजे की है, जब अमूमन गांवों में लोगों की आवाजाही रहती है। पूर्व प्रधान व वरिष्ठ पत्रकार अनूप सिंह जीना की सुपुत्री मिताली जीना (ममता) अपने घर के पीछे वाले हिस्से में बैठी हुई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे एक विशालकाय गुलदार ने अचानक उसकी तरफ बढ़ना शुरू कर दिया।
गुलदार को अपनी ओर लपकता देख मिताली ने तुरंत खतरा भांपा। बिना एक पल गंवाए उसने चीखना-चिल्लाना शुरू किया और पास पड़े पत्थरों को उठाकर गुलदार पर दे मारा।
“बेटी की सूझबूझ से बची जान, मां भी दौड़कर मौके पर पहुंची”
पूर्व प्रधान अनूप सिंह जीना ने बताया कि बेटी मिताली के चिल्लाने की आवाज सुनकर उनकी पत्नी (मिताली की मां) भी अपनी जान की परवाह किए बिना मौके की तरफ दौड़ पड़ीं। मां-बेटी ने मिलकर गुलदार का मुकाबला किया और अपनी बकरी को उसके जबड़े से छुड़ाने का भरसक प्रयास भी किया। लेकिन खूंखार गुलदार अंततः बकरी को घसीटते हुए घने जंगल की ओर भागने में सफल रहा।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा वन विभाग और प्रशासन
इस दुस्साहसिक घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पूर्व प्रधान व पत्रकार अनूप सिंह जीना ने ग्राम प्रधान सिरसा भुवन चन्द्र और वन क्षेत्राधिकारी (RFO) विजय भट्ट को सूचित किया।
- संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन: सूचना मिलते ही वन विभाग की एक हाई-लेवल टीम फोरेस्टर संजय टम्टा के नेतृत्व में तुरंत घटनास्थल पर पहुंची।
- सर्च अभियान: ग्राम प्रधान भुवन चन्द्र, वन विभाग के कर्मियों और आक्रोशित ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से पूरे इलाके का दौरा कर गुलदार को तलाश।
- कार्रवाई: वन विभाग की टीम की मौजूदगी में बाद में मृत बकरी के अवशेषों को गड्ढे में दबाकर आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी की गई।
इलाके में दहशत का माहौल, पिंजरा लगाने की उठी मांग
दिनदहाड़े हुए इस हमले के बाद चोनीखेत और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी दहशत और खौफ का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह के समय जब लोग काम पर निकलते हैं, तब गुलदार का इस तरह हमला करना यह साबित करता है कि वन्यजीव अब पूरी तरह बेखौफ हो चुके हैं और इंसानी बस्तियों को अपना शिकार बना रहे हैं।
ग्राम प्रधान भुवन चंद्र ने वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट से तुरंत संज्ञान लेते हुए क्षेत्र में शिकारी गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की सख्त मांग की है।
वन विभाग का आश्वासन और गाइडलाइन जारी
| वन विभाग द्वारा उठाए गए कदम | ग्रामीणों के लिए प्रशासनिक अपील |
|---|---|
| • प्रभावित क्षेत्र में तुरंत कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। | • सुबह और शाम के वक्त अकेले सुनसान रास्तों पर न जाएं। |
| • वन कर्मियों द्वारा प्रभावित इलाके में गश्त (Patrolling) बढ़ा दी गई है। | • बच्चों और मवेशियों को अकेले खुले में न छोड़ें। |
| • उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आवश्यकता पड़ने पर पिंजरा भी लगाया जाएगा। | • किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें। |
इस घटना ने एक तरफ जहां वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीवों के आबादी में बढ़ते दखल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ हर कोई मिताली (ममता) की बहादुरी की दाद दे रहा है, जिसने खुद की जान तो बचाई ही, बल्कि ग्रामीणों को भी एक बड़े हादसे से सचेत कर दिया।


