धामी को बताया अपना ‘धाकड़’ सारथी
देवभूमि को दी ₹2.25 लाख करोड़ की सौगात
अब न जाम की झंझट, न घंटों का इंतजार!
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के वो 5 फीचर्स, जो आपका सफर यादगार बना देंगे
CNE REPORTER, देहरादून। सिर पर गौरवमयी ब्रह्मकमल टोपी, जुबां पर अपनों के लिए ‘भुला-भुलियों’ और ‘सयाणा’ जैसे आत्मीय शब्द और हृदय में उत्तराखंड को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प— मंगलवार को देहरादून की धरती एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब रिमोट का बटन दबाकर 210 किमी लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया, तो यह केवल एक सड़क का उद्घाटन नहीं था, बल्कि विकास के एक नए युग का शंखनाद था।

दूरी घटी, दिल मिले: 6 घंटे का सफर अब सिर्फ ढाई घंटे में
इस एक्सप्रेस-वे ने दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी को सिर्फ किलोमीटर में ही नहीं, बल्कि वक्त में भी समेट दिया है। जो सफर पहले मुजफ्फरनगर और मेरठ के जाम से जूझते हुए 6 से 8 घंटों में तय होता था, अब वह मात्र 2.30 घंटे में पूरा होगा। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र की ‘भाग्य रेखा’ बताते हुए कहा कि ये सड़कें केवल आर्थिकी का आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की समृद्धि की ‘मोदी गारंटी’ हैं।
विकास की त्रिवेणी और पर्यावरण का सम्मान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक मंत्र दिया— प्रगति, प्रकृति और संस्कृति। उन्होंने जोर दिया कि विकसित भारत के लिए इन तीनों का संगम अनिवार्य है। वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस एक्सप्रेस-वे पर 12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, ताकि इंसानी विकास से बेजुबान जानवरों को कष्ट न हो।

भावुक संबोधन: “तीसरा दशक उत्तराखंड का”
बाबा केदार की भूमि पर कही अपनी बात को दोहराते हुए पीएम ने गर्व से कहा, “मैंने कहा था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा, और आज डबल इंजन की सरकार इसे सच कर रही है।” उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए उत्तराखंड की सराहना करते हुए कहा कि देवभूमि ने पूरे देश को नई राह दिखाई है।
अद्भुत ‘लोकल कनेक्ट’ और धामी संग जुगलबंदी
मंच पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मजबूत बॉन्डिंग ने सबका ध्यान खींचा। पीएम ने धामी को ‘लोकप्रिय, कर्मठ और युवा’ कहकर सराहा। भाषण के दौरान जब उन्होंने मां डाटकाली के आशीर्वाद, पंच बदरी-पंच केदार और नंदा राजजात का जिक्र किया, तो पूरा गढ़ी कैंट मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
भाषण की बड़ी बातें:
- नारी शक्ति: 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण का हक मिलकर रहेगा।
- पर्यटन का नया रिकॉर्ड: आदि कैलाश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ सौ से बढ़कर 40 हजार के पार पहुँचना सुखद है।
- स्वच्छता की अपील: पर्यटकों से आग्रह किया कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखें, प्लास्टिक और कूड़ा फैलाकर इसकी आत्मा को ठेस न पहुँचाएं।
- सैनिक सम्मान: जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड से शहीद बाबा जसवंत सिंह को नमन करते हुए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ के जरिए पूर्व सैनिकों को दिए गए सवा लाख करोड़ का जिक्र किया।
निष्कर्ष: 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि उत्तराखंड के लोगों के लिए मोदी केवल प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि परिवार के एक अभिभावक हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के रूप में मिली यह सौगात न केवल पर्यटन को पंख लगाएगी, बल्कि ‘वेड इन उत्तराखंड’ और ‘विंटर टूरिज्म’ जैसे सपनों को हकीकत में बदलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस ओजस्वी संबोधन को और भी प्रभावी और ‘इम्पैक्टफुल’ बनाने के लिए यहाँ बेहतर ढंग से तैयार की गई रिपोर्ट दी गई है। इसे आप पहली खबर के साथ जोड़ सकते हैं या अलग से भी प्रकाशित कर सकते हैं।
“रफ़्ता-रफ़्ता नहीं, अब रफ़्तार से बढ़ रहा भारत”: देवभूमि से CM धामी ने भरी विकास की हुंकार
देहरादून। “अब रफ़्ता-रफ़्ता नहीं, पूरी रफ़्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारत; अब नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद से जीत रहा है भारत।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन काव्य पंक्तियों के माध्यम से न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया, बल्कि नए भारत और उभरते उत्तराखंड की बुलंद तस्वीर भी पेश की।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को ‘नंदा राजजात’ की स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का हर दौरा देवभूमि के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि विकास की नई ऊर्जा और हजारों करोड़ की सौगात लेकर आता है।
एशिया का सबसे बड़ा कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण का संतुलन
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि आज उत्तराखंड को ₹12 हजार करोड़ की लागत से बने एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का उपहार मिल रहा है। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकास भी और विरासत भी’ का संकल्प धरातल पर उतर रहा है।
बाबा साहेब को नमन और सामाजिक समरसता
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन दोहरी खुशी का है। एक ओर हम आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाबा साहेब के सामाजिक न्याय और वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने के सपने को मोदी सरकार साकार कर रही है। उन्होंने सिख नव वर्ष और बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताया।
‘प्रथम गांव’ से ‘वेड इन उत्तराखंड’ तक: मोदी का अटूट नाता
मुख्यमंत्री ने उन प्रमुख पड़ावों को याद किया जहाँ प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रुचि लेकर उत्तराखंड का मान बढ़ाया:
- माणा: देश के आखिरी गांव को ‘देश का प्रथम गांव’ घोषित कर विकास की नई परिभाषा लिखी।
- वेड इन उत्तराखंड: डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पूरी दुनिया को उत्तराखंड आने का न्योता दिया।
- आदि कैलाश: प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद इस क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली।
- शीतकालीन पर्यटन: हर्षिल और मुखबा के जरिए विंटर टूरिज्म को नई दिशा दी।
विकल्प रहित संकल्प: श्रेष्ठ उत्तराखंड का लक्ष्य
मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के उस भरोसे को टूटने नहीं देगी, जिसमें उन्होंने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। उन्होंने कहा कि “विकल्प रहित संकल्प” के साथ हम 2025 तक उत्तराखंड को देश का अग्रणी और श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए पूरी गति से कार्य कर रहे हैं।


