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ALMORA NEWS: ‘क्या’, ‘क्यों’ व ‘कैसे’ से जानें किसी बात के पीछे छिपी सच्चाई; वेबीनार में पुरातत्वविद् डॉ. जीवन सिंह खर्कवाल ने बच्चों में जगाई वैज्ञानिक अलख

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
हमें ‘क्यों’, ‘कैसे’ व ‘क्या’ जैसे तर्क-वितर्क करके ही किसी बात की तह में जाना चाहिए और संतोषजनक पाए जाने पर ही उस बात पर विश्वास करना चाहिए। यह बात बच्चों की चर्चित पत्रिका ‘बालप्रहरी’ तथा बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 61वें वेबीनार में मुख्य अतिथि एवं पुरातत्वविद् डॉ. जीवन सिंह खर्कवाल ने कही। डा. खर्कवाल साहित्य संस्थान जनार्दन राय नागर विद्यापीठ उदयपुर, राजस्थान के निदेशक हैं।
वेबीनार में आनलाइन भाषण देते हुए डा. खर्कवाल ने बच्चों से कहा कि रात को झाडू़ क्यों नहीं लगाना चाहिए। किसी निश्चित दिन ही निश्चित दिशा की यात्रा करनी चाहिए या छींक आने पर यात्रा स्थगित करनी चाहिए आदि-आदि बातें अक्सर सुनने में आती हैं। लेकिन इन बातों पर विश्वास करने से पहले यह जानना चाहिए कि इन बातों के पीछे राज क्या है। उन्होंने कहा कि पहले जमाने में रात में बिजली का प्रकाश नहीं था। रात को झाड़ू लगाने पर बहुमूल्य सामान कूड़े में जाने की शंका रहती थी। इसलिए रात को झाड़ू लगाना वर्जित था, परंतु आज के दौर में रात-दिन प्रकाश की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अन्य बातों के पीछे का रहस्य जानना चाहिए, लेकिन हम ऐसा न करके कुछ अंध विश्वासों पर भी विश्वास कर लेते हैं।
उन्होंने कहा कि आज विज्ञान का युग है। ऐसे में हमें अंध विश्वास के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना चाहिए। उन्होंने हड़प्पा संस्कृति के बारे में बताया कि लगभग पांच हजार साल पहले हड़प्पा की संस्कृति में घर के आसपास नालियों को बंद रखने के प्रमाण हैं, परंतु वर्तमान में हमारे यहां घर के आस पास नालियां खुली रहती हैं। उन्होंने बच्चों से वैज्ञानिक सोच अपनाने तथा पुस्तकें पढ़ने की आदत डालने की बात कही।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक बाल प्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने बताया कि त्वरित भाषण में प्रतिभाग करके बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। त्वरित भाषण का संचालन नोजगे पब्लिक स्कूल खटीमा की कक्षा-8 की छात्रा भूमि बिष्ट ने किया और ज्योति पांडे, रोमा चंद, तनुज सिंह खेतवाल, अभिषेक कुमार व जिया जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण के साथ ही त्वरित विषय पर अपना भाषण प्रस्तुत किया। डा. खर्कवाल के इस त्वरित भाषण में चित्रांशी, प्रांजलि, पवन, पिंकी, इधांत, खुशी, कौस्तुभ, चैतन्य, प्रेरणा, पूर्वांशी, आदित्य, कार्तिक, शिवसागर, साक्षी, अरमान, शैली, पलक, धु्रव, दीपांशु, विधि, आदिश्री, अमृत, नलिन, सिमरन, तन्मय, युवराज व आयरा समेत तीसरी से बारहवीं कक्षा तक के 39 बच्चों ने भाग लिया।
वेबीनार में शिक्षा विभाग उत्तराखंड के उप निदेशक आकाश सारस्वत, बालप्रहरी के संरक्षक श्यामपलट पांडे (अहमदाबाद), बाल पक्ष की संपादक डॉ. कुसुम नैथानी (देहरादून), डॉ. प्रेम प्रकाश पुरोहित (चमोली), उद्धव भयवाल (औरंगाबाद), शशि ओझा (भीलवाड़ा), हरीश सेठी (सिरसा), सुधा भार्गव (बंगलौर), गीता धामी (खटीमा), बृजमोहन जोशी (चंपावत), आभा जोशी (लखीमपुर), देवसिंह राना (दिल्ली), नरेंद्र गोस्वामी (कपकोट) आदि ने बच्चों के विचार सुने।

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