» प्रदेश की अधिकतम सीटों पर प्रत्याशी उतारने का भी लिया निर्णय

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) 9 अगस्त, 2026 से प्रदेश में ‘परिवर्तन जन संवाद यात्रा’ निकालेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में अधिकतम सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। यह निर्णय पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है।
हरिद्वार में पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक से लौटने के बाद उपपा के केंद्रीय संयोजक पीसी तिवारी ने यहां बताया कि बीते रविवार को हरिद्वार स्थित गुलजारीलाल नंदा धर्मशाला में केन्द्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी की अध्यक्षता एवं प्रधान महासचिव नरेश चन्द्र नौड़ियाल के संचालन में बैठक हुई। जिसमें आगामी विधानसभा चुनाव अधिकतम सीटों पर लड़ने तथा सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक परिवर्तन के लिए ईमानदार, जनपक्षधर एवं संघर्षशील शक्तियों को एकजुट करने का संकल्प लिया गया। तिवारी ने बताया कि बैठक में तय हुए कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में प्रदेशव्यापी ‘परिवर्तन जन संवाद यात्रा’ का शुभारम्भ 09 अगस्त यानी भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर खटीमा से होगा। यह यात्रा पूरे उत्तराखंड में जनसंवाद स्थापित करते हुए राज्य के ज्वलंत मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी।
उन्होंने बताया कि बैठक में केंद्र सरकार की आर्थिक एवं विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा गया कि वर्तमान नीतियां देश के हितों की रक्षा करने में विफल रही हैं। यह आरोप भी लगा कि भारत सरकार अपने नागरिकों के हितों के बजाय बाहरी दबावों के अनुरूप कार्य कर रही है, जिससे राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं। कार्यकारिणी ने राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी उत्तराखंड की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खेती-किसानी संकट में है, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर हैं तथा राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर दोहन हो रहा है। सम्मानजनक रोजगार के स्थान पर युवाओं को संविदा, आउटसोर्सिंग, मानदेय और ठेका व्यवस्था में धकेला जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए आम जनता संघर्ष कर रही है तथा सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं, श्रमिक संगठनों और आंदोलनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। यह भी कहा गया कि अंकिता भंडारी और केतन हत्याकांड जैसे मामलों ने समाज को झकझोर दिया है।
कार्यकारिणी ने राज्य में युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए नशे के कारोबारियों एवं उनके संरक्षकों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाने की मांग की। साथ ही राज्य में तेजी से खुल रही सरकारी शराब की दुकानों पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार को शराब की उपलब्धता बढ़ाने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए। बैठक में रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करने, संविदा, आउटसोर्स, मानदेय एवं ठेका व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा “समान कार्य के लिए समान वेतन” लागू करने की मांग की गई। पार्टी ने आईएमपीसीएल सहित सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और कर्मचारियों की छंटनी का विरोध करते हुए श्रमिक आंदोलनों पर हो रहे दमन की निंदा की तथा श्रमिक नेताओं पर लगाए गए गुंडा एक्ट एवं अन्य मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।



