कानून की दुनिया में AI की एंट्री: विधि सहयोगी

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एसएसजे विवि कुलपति ने राज्यपाल के समक्ष ‘विधि सहयोगी’ एप का दिया प्रस्तुतिकरण
एसएसजे विवि कुलपति ने राज्यपाल के समक्ष ‘विधि सहयोगी’ एप का दिया प्रस्तुतिकरण

अल्मोड़ा के एसएसजे विवि ने बनाया खास एप्लिकेश

एप के जरिए घर बैठे जानें अपना अधिकार और केस की स्थिति !

  • रमेश जड़ौत की विशेष रिपोर्ट

अल्मोड़ा। क्या आपने कभी सोचा है कि कानून की पेचीदगियाँ और वकीलों की भारी-भरकम शब्दावली आपकी समझ में इतनी आसानी से आ जाएगी जैसे मोबाइल पर कोई गेम खेलना? जी हां, तकनीक के इस बदलते दौर में अब अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना (SSJ) विश्वविद्यालय ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकती है।


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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में कदम बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय ने ‘विधि सहयोगी‘ नामक एक क्रांतिकारी मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया है। यह एप आम आदमी और न्याय के बीच की दूरी को मिटाने के संकल्प के साथ लाया जा रहा है।

सरल भाषा में समझें अपना अधिकार

अक्सर देखा जाता है कि कानूनी दस्तावेजों की भाषा इतनी कठिन होती है कि एक आम नागरिक उसे समझ ही नहीं पाता। ‘विधि सहयोगी’ एप इसी बाधा को दूर करेगा।

  • आसान भाषा: यह एप लोगों को उनकी अपनी सरल भाषा में कानून की जानकारी देगा।
  • अधिकारों के प्रति जागरूकता: जनमानस को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के प्रति सचेत करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
  • अध्ययन सामग्री: कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों और जिज्ञासु नागरिकों के लिए इस पर प्रचुर मात्रा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी।

वकीलों से जुड़ना होगा आसान

अक्सर लोग कानूनी मुसीबत में पड़ने पर सही वकील की तलाश में भटकते हैं। इस एप के माध्यम से उपयोगकर्ता न केवल कानूनी विषयों की जानकारी ले सकेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर सीधे अधिवक्ताओं से संपर्क भी कर सकेंगे। यह फीचर कानूनी सहायता की पहुंच को हर घर तक पहुंचा देगा।

भविष्य की तैयारी: केस ट्रैकिंग और सरकारी योजनाएं

विवि के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने इस एप का शानदार प्रस्तुतीकरण महामहिम राज्यपाल ले. जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह के समक्ष दिया। उन्होंने बताया कि यह तो बस शुरुआत है। भविष्य में इस एप को एक ‘सुपर एप’ बनाने की तैयारी है, जिसमें:

  1. ऑनलाइन परामर्श: घर बैठे कानूनी सलाह।
  2. केस ट्रैकिंग: अपने मुकदमे की स्थिति की पल-पल की जानकारी।
  3. दस्तावेज प्रबंधन: जरूरी कानूनी कागजातों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना।
  4. सरकारी योजनाएं: सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और उनसे जुड़ने का तरीका।

राज्यपाल ने थपथपाई टीम की पीठ

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालय की इस पहल को ‘समाज को सशक्त बनाने वाला नवाचार’ बताया। उन्होंने एप्लिकेशन तैयार करने वाली टीम और विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे एप्स से समाज में विधिक जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि एप को समय-समय पर अपडेट किया जाए ताकि इसकी उपयोगिता बनी रहे।

निष्कर्ष: ‘विधि सहयोगी’ सिर्फ एक मोबाइल एप नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की दिशा में न्याय को लोकतांत्रिक बनाने का एक बड़ा प्रयास है। जल्द ही होने वाली इसकी लॉन्चिंग का इंतजार अब पूरे प्रदेश को है।

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