HomeBreaking Newsएनजीटी नियमों की उड़ी धज्जियां: नदी किनारे फेंका सैकड़ों टन मलबा

एनजीटी नियमों की उड़ी धज्जियां: नदी किनारे फेंका सैकड़ों टन मलबा

एसडीएम ने बिठाई जांच, भड़के लोग

पूर्व प्रधान ने उठाया मामला

सीएनई रिपोर्टर, गरमपानी (नैनीताल)। देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों और पवित्र नदियों को विकास की आड़ में मलबे के ढेर में तब्दील करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। गरमपानी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर पवित्र शिप्रा नदी के किनारे सैकड़ों टन मलबा डंप कर दिया गया, जिससे एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के कड़े दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दीं। इस मनमानी से क्षेत्रीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया है और कैंची धाम के एसडीएम ने पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।

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दरअसल, यह पूरा मामला गरमपानी पोस्ट ऑफिस के समीप का है, जहां कुमाऊँ विकास मंडल निगम लिमिटेड (केएमवीएन) की ओर से एक नए पेट्रोल और डीजल पंप का निर्माण कार्य किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान खुदाई से सैकड़ों टन भारी-भरकम मलबा निकला। इस मलबे का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने के बजाय, कार्यदायी संस्था ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। बिना किसी वैध अनुमति के इस समूचे मलबे को दोपाखी के पास सीधे शिप्रा नदी के किनारे फेंकना शुरू कर दिया गया।

रविवार की सुबह मची खलबली, ग्रामीणों ने रुकवाया काम

रविवार की सुबह जैसे ही स्थानीय लोगों ने देखा कि बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से मलबे को नदी किनारे डंप किया जा रहा है, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। नदियों के अस्तित्व को खतरे में पड़ता देख जागरूक ग्रामीणों ने तुरंत मोर्चा संभाला। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए सीधे प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों को फोन पर मामले की शिकायत दर्ज कराई। भारी विरोध और प्रशासनिक दखल के बाद आखिरकार मौके पर चल रहे मलबे के अवैध निस्तारण के कार्य को जबरन रुकवाया गया।

2021 की खौफनाक आपदा की यादें हुईं ताजा

गरमपानी के पूर्व प्रधान त्रिभुवन पाठक ने इस कृत्य पर तीखी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नदी किनारे इस तरह बेतरतीब मलबा फेंकना सीधे तौर पर आगामी मानसून में एक बड़ी आपदा को खुला निमंत्रण देना है। उन्होंने साल 2021 में क्षेत्र में आई भीषण आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त मलबे और बाढ़ के कारण रिहायशी इलाकों और मकानों में भारी तबाही मची थी। श्री पाठक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर इस संवेदनशील जगह से मलबा तुरंत नहीं हटाया गया, तो बरसात में नदी का प्रवाह रुकने से आबादी क्षेत्र को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

एसडीएम अनुराग आर्य का सख्त एक्शन, जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासनिक अमला भी अलर्ट मोड पर आ गया है। कैंची धाम के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अनुराग आर्य ने साफ तौर पर कहा कि नदी क्षेत्रों में इस तरह का अवैध डंपिंग कार्य किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यदायी संस्था को तत्काल प्रभाव से नदी किनारे से सारा मलबा हटाने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, शिप्रा नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के इस गंभीर मामले में औपचारिक जांच भी बैठा दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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