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अल्मोड़ा : घोर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे BSNL ठेका कर्मी

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वेतन और वैधानिक लाभों से वंचित

पुराना ठेका: न नियमित वेतन, न PF, न कार्रवाई

1 सितंबर 2025 से लागू नए ठेके में भी गड़बड़ी

BSNL अल्मोड़ा के ठेका कर्मियों का जैम पोर्टल के बावजूद शोषण जारी, तीन माह से वेतन और PF/ESI जैसे वैधानिक लाभों से वंचित; जानें पूरा मामला और नवीनतम अपडेट।

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल (BSNL) में कार्यरत ठेका कर्मियों का जीवन गहन आर्थिक संकट में है। विशेष रूप से, जैम (GeM) पोर्टल के माध्यम से भर्ती किए गए इन कर्मचारियों को शासन-प्रशासन की घोर उदासीनता का शिकार होना पड़ रहा है।

परिणामस्वरूप, अल्मोड़ा जनपद में लगभग तीन दर्जन ठेका कर्मियों को उनके निर्धारित वेतन तो दूर, न्यूनतम वेतन तक का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। वास्तव में, विभाग को सालों से अपनी सेवा दे रहे इन कर्मचारियों के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी दूभर हो गया है।


आउटसोर्सिंग प्रक्रिया ने छीने वैधानिक लाभ

ठेका कर्मियों को नई आउटसोर्सिंग प्रक्रिया ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। गौरतलब है कि पहले इन कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), और ग्रेच्युटी जैसे महत्वपूर्ण वैधानिक लाभ मिलते थे। लेकिन अब ये लाभ या तो पूरी तरह से हटा दिए गए हैं, या इन्हें ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रति माह मात्र ₹5,000 जितना कम भुगतान किया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी के मानकों का सरासर उल्लंघन है।

प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जिम्मेदारी से BSNL का हटना

बताना चाहेंगे कि, नई व्यवस्था के तहत BSNL ने स्वयं को प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की स्थिति से हटा लिया है। निश्चित रूप से, इस कदम से कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन और वैधानिक लाभों को सुनिश्चित करने में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। स्पष्ट है कि इसका भरपूर लाभ संबंधित ठेकेदारों द्वारा इन कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करके उठाया जा रहा है।

तीन माह का वेतन बकाया, नौकरी से निकालने की धमकी

ठेका कर्मियों का कहना है कि संबंधित ठेकेदारों द्वारा उन्हें विगत तीन माह का वेतन तक नहीं दिया गया है। इसके अलावा, सेवा स्तर समझौते (Service Level Agreement) के नाम पर कर्मचारियों को अक्सर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि इनमें से कई कर्मचारी 20 से 25 वर्षों तक लगातार बीएसएनएल के लिए काम करते रहे हैं। साथ ही, यह भी शिकायत है कि सभी ठेका कर्मचारियों को नई प्रक्रिया के तहत शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण कुछ पुराने और अनुभवी लोग बाहर रह गए हैं।

दुःख की बात है कि इन ठेका कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) का कोई भी लाभ देने का प्रावधान तक नहीं रखा गया है।


अल्मोड़ा में ठेका कर्मियों की वास्तविक स्थिति

ज्ञात रहे कि अल्मोड़ा में शिफ्ट इंटरकॉम के अंतर्गत करीब 30 से 35 अप्रशिक्षित ठेका कर्मी कार्यरत हैं। इनमें से कई तो वर्ष 1998 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

  • जैम पोर्टल के माध्यम से हुई नियुक्ति के समय न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) ₹541 प्रति कार्य दिवस तय की गई थी।
  • इस हिसाब से 26 दिन के कार्य के लिए कर्मचारियों का लगभग ₹14,066 वेतन बनता था।

ठेका कर्मियों ने बताया कि इससे पहले का पी.एन.जी कंपनी का ठेका 4 साल तक चला था। उस दौरान न तो नियमित वेतन मिला और न ही पीएफ जमा करवाया गया था। उस ठेके का भी तीन माह का वेतन आज तक बकाया है। कर्मचारियों ने कई बार शिकायत की, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नवीन ठेके में भी वेतन और पीएफ में धांधली

1 सितंबर, 2025 से लागू हुए नवीन ठेके के अनुसार यह तय हुआ था कि अब ₹541 प्रति कार्य दिवस के हिसाब से वेतन मिलेगा, और साथ ही भविष्य निधि (PF) व कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) भी काटा जाएगा।

दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि इस बार भी अप्रशिक्षित ठेका कर्मियों को ₹14,066 के बजाय केवल ₹9,000 वेतन दिया जा रहा है।

आरोप है कि कर्मचारियों का पीएफ भी कम काटा जा रहा है।

  • पीएफ में मात्र ₹7,700 वेतन दिखाया जा रहा है।
  • इस हिसाब से इसका 12 प्रतिशत, यानी ₹930 काटा जा रहा है।
  • जबकि कर्मचारियों का वास्तविक वेतन ₹14,066 तय हुआ था।

यह सारी जानकारी जैम पोर्टल में अपलोड किए गए एग्रीमेंट में भी उपलब्ध है। इसलिए, प्रशासन को अतिशीघ्र इस मामले में हस्तक्षेप कर ठेका कर्मियों के साथ हो रहे इस अन्याय को रोकना चाहिए।

👉 नोट : इस मामले में संबंधित अधिकारियों को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिफ नहीं समझा। वार्ता होने पर अधिकारियों का वर्जन भी दिया जायेगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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