► काल्पनिक तबाही, असली तैयारी: अल्मोड़ा में आपदा की 6 जगह रिहर्सल
► मॉक ड्रिल के जरिये काल्पनिक हादसों पर परखी गई फुर्ती और समन्वय
► बरसात में संभावित आपदाओं से निपटने को विभागों ने कसी कमर

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: बादल फटने, बस दुर्घटना और भारी भूस्खलन से मची तबाही में आपदा प्रबंधन की टीमें संकटमोचक बनी। गुरूवार को जिले में 6 जगहों कुछ ऐसा नजारा दिखा, जिसके जरिये बरसात के मौसम में संभावित आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कसी। यह नजारा मॉक ड्रिल का था। जिसमें काल्पनिक हादसों के जरिये आपदा तंत्र की बचाव व राहत कार्यों में सक्रियता, संबंधित इंतजामों व विभागीय समन्वय को परखा गया। यह मॉक ड्रिल जिलाधिकारी अंशुल सिंह के निर्देशन में हुआ।

मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने और इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुदृढ़ करने तथा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की कार्यक्षमता एवं तत्परता का परीक्षण करने के उद्देश्य से गुरुवार को जनपद के छह विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित किया गया। मॉक ड्रिल के लिए विभिन्न प्रकार की आपदा संबंधी काल्पनिक परिस्थितियां तैयार की गई और संबंधित विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय, बचाव एवं राहत कार्यों का अभ्यास कराया गया। इसके अंतर्गत रानीखेत की इंदिरा बस्ती में भूस्खलन, द्वाराहाट के सलना गांव में बादल फटने, सल्ट क्षेत्र में बस दुर्घटना, लमगड़ा विकासखंड के कनरा गांव में बादल फटने, जागेश्वर धाम में भीड़ प्रबंधन तथा क्वारब क्षेत्र में भूस्खलन की काल्पनिक परिस्थिति के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों का सफल अभ्यास किया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य, अग्निशमन, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, जल संस्थान, एसडीआरएफ, सहित अन्य संबंधित विभागों एवं एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ निर्धारित मानकों के अनुरूप राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। घटनास्थलों पर घायलों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने, आवश्यकतानुसार अस्पताल भेजने, प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित करने तथा संचार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने संबंधी कार्यवाही का भी अभ्यास किया गया। क्वारब क्षेत्र के मॉक ड्रिल के लिए स्टेजिंग एरिया पुलिस लाइन में स्थापित किया गया, जहां से राहत एवं बचाव दलों, आवश्यक संसाधनों तथा उपकरणों का संचालन एवं समन्वय किया गया।
इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) के अंतर्गत नामित अधिकारीगण कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा परिचालन केंद्र में उपस्थित रहे। यहां से संपूर्ण मॉक ड्रिल की सतत निगरानी करते हुए विभिन्न घटनास्थलों से प्राप्त सूचनाओं का आदान-प्रदान, संसाधनों का समन्वय तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। इस दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े संचार तंत्र एवं विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय की भी प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून अवधि में किसी भी प्रकार की आपदा में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक होती है। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभागों की तैयारी का आकलन करना, कमियों की पहचान कर उनमें सुधार लाना तथा आपदा की वास्तविक परिस्थितियों में जन-धन की हानि को न्यूनतम करना शामिल रहा। उन्होंने सभी विभागों को मानसून अवधि के दौरान पूर्ण सतर्कता एवं समन्वय के साथ कार्य करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।



