संशय खत्म : लोक पर्व ‘इगास’ की छुट्टी के आदेश में परिवर्तन, अब सोमवार अवकाश घोषित

देहरादून। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लोकपर्व ‘इगास’ को लेकर सरकार ने राजकीय अवकाश के आदेश जारी कर दिए है। राज्यपाल उत्तराखण्ड राज्य के अधीन…


देहरादून। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लोकपर्व ‘इगास’ को लेकर सरकार ने राजकीय अवकाश के आदेश जारी कर दिए है।

राज्यपाल उत्तराखण्ड राज्य के अधीन प्रदेश के समस्त शासकीय/अशासकीय कार्यालयों/शैक्षणिक शासकीय/अशासकीय कार्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों/विद्यालयों में इगास बग्वाल हेतु सोमवार 15 नवम्बर 2021 को सार्वजनिक अवकाश (बैंकों/ कोषागारों/उप कोषागारों को छोड़कर) घोषित किये जाने की सहर्ष स्वीकृत प्रदान करते हैं।

गौरतलब है कि ‘इगास’ 14 नवंबर यानी रविवार को पड़ रहा है, लेकिन सरकार ने उसके 1 दिन बाद यानी 15 नवंबर को इसको लेकर छुट्टी घोषित कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं।

जानिये, क्या है इगास, छ्ट्टी की घोषणा पर क्यों हुआ बवाल ?

उत्तराखंड में बग्वाल, इगास मनाने की परंपरा है। दीपावली को यहां बग्वाल कहा जाता है, जबकि बग्वाल के 11 दिन बाद एक और दीपावली मनाई जाती है, जिसे इगास कहते हैं। पहाड़ की लोक संस्कृति से जुड़े इगास पर्व के दिन घरों की साफ-सफाई के बाद मीठे पकवान बनाए जाते हैं और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। गढ़वाली में एकादशी को इगास कहते हैं। इसलिए इसे इगास बग्वाल के नाम से जाना जाता है। ज्ञात रहे कि पूर्व में छुट्टी का दिन संडे हो जाने पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने मुख्यमंत्री की छुट्टी की घोषणा पर सवाल खड़े किये थे। उन्होंंने ट्वीट किया था कि ”कोरी घोषणाओं के क्रम में इस वर्ष इगास मनाने के दिन छुट्टी करने का निर्णय भी कोरी घोषणाओं में सम्मिलित हो गया है। 14 तारीख को इगास है, इसी दिन इतवार भी है अर्थात सरकार की घोषणा का लाभ इगास प्रेमी लोगों को नहीं मिलने जा रहा, सरकार की घोषणा इसी वर्ष के लिए है।”

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