नैनीताल। हल्द्वानी के रानीबाग में विद्युत शवदाह गृह बनाए जाने के मामले को लेकर आज उच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को प्रति शपथपत्र देने के निर्देश दिए हैं। आज ही नगर निगम हल्द्वानी को अदालत में शपथ पत्र देकर साफ किया कि विद्युत शवदाह गृह नदी से काफी ऊपर प्रस्तावित है जबकि जियारानी की पवित्र शिला नीचे नदी की ओर है।
आज न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के सामने इस मामले की सुनावाई हुई। याचिका कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा है कि निगम जिस स्थान पर विद्युत शवदाह गृह बनाना चाह रहा है उस स्थान पर वे वर्षों से पूजा अर्चा करते आ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार रानीबाग कत्यूरी समाज का एक धर्मस्थल है जिसका जिक्र पुराणों में चित्रेश्वर नाम से दर्ज है। यही नही 1847 के ब्रिटिश रिकॉर्ड में कहा गया है कि इस स्थल पर सदियों से मेला लगता आया है। आरोप लगाया कि नगर निगम मन्दिर की भूमि को भी अधिकृत कर विद्युत शवदाह गृह बनाने की प्रक्रिया गतिमान है। नगर निगम ने इससे पहले कत्यूरी के समाज के किसी व्यक्ति से राय भी नहीं ली, जबकि यह भूमि मन्दिर के नाम से दर्ज है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि ‘वरशिप आफ स्पेशल प्रोविजन एक्ट 1991’ की धारा 3 के अनुसार, 15 अगस्त 1947 यह कहता है कि जो भूमि जिसके लिए शुरक्षित थी उसका प्रयोग उसी के लिए किया जाएगा, उसका स्वरूप नही बदला जा सकता है। लेकिन अब विद्याुत शवदाह गृह बनाकर मंदिर के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है। जो संविधान के अनुच्छेद 14, 21 व 25 का उल्लंघन है। अदालत ने याचिकाकर्ता को प्रतिशपथ पत्र जमा कराने का निर्देश दिए हैं।
रानीबाग में विद्युत शवदाह गृह बनाने का मामला: हाईकोर्ट ने कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों से मांगा प्रति शपथपत्र
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