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बागेश्वर: रवाईखाल में घायल मादा गुलदार का सफल रेस्क्यू

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वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा खतरा

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर | जनपद के बागेश्वर रेंज अंतर्गत रवाईखाल बिजोरीझाल क्षेत्र में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक घर के ठीक पीछे घायल अवस्था में मादा गुलदार दिखाई दी। वन विभाग ने सूझबूझ और फुर्ती दिखाते हुए गुलदार को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है, जिससे ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह रवाईखाल बिजोरीझाल निवासी गोकपाल सिंह के मकान के पीछे झाड़ियों में हलचल महसूस की गई। जब ग्रामीणों ने करीब जाकर देखा, तो वहां एक मादा गुलदार अधमरी और घायल अवस्था में पड़ी थी। आबादी के इतने करीब गुलदार को देख गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी।

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सटीक निशाना और सुरक्षित रेस्क्यू

सूचना मिलते ही बागेश्वर रेंज की टीम रेंजर केवलानंद पांडेय के नेतृत्व में साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंची। गुलदार घायल होने के कारण आक्रामक हो सकता था, जिसे देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी सावधानी बरती गई।

  • रणनीति: टीम ने घेराबंदी कर गुलदार की स्थिति का जायजा लिया।
  • ट्रैंकुलाइज: विशेषज्ञ टीम ने गुलदार को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) किया।
  • सफलता: बेहोश होने के बाद मादा गुलदार को सुरक्षित पिंजरे में डालकर वन विभाग के केंद्र ले जाया गया।

“गुलदार घायल था, इसलिए वह आबादी वाले क्षेत्र में दुबक गया था। हमारी प्राथमिकता उसे बिना नुकसान पहुँचाए काबू करना था। वर्तमान में उसे उपचार के लिए केंद्र में रखा गया है।” — केवलानंद पांडेय, रेंजर


इस सफल रेस्क्यू अभियान में रेंजर पांडेय के साथ वन दरोगा तारा सिंह, वन दरोगा नवीन कुमार, बीट अधिकारी चंदन राम, हेम पाठक और सीआरटी (CRT) टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम की इस मुस्तैदी की ग्रामीणों ने सराहना की है।

इलाज के बाद मिलेगी ‘आजादी’

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गुलदार के शरीर पर चोट के निशान हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। पूरी तरह स्वस्थ होने और डॉक्टरों की हरी झंडी मिलने के बाद ही उसे उच्च हिमालयी क्षेत्र या उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा।

वन विभाग की अपील: “जोखिम न लें”

घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्रीय जनता से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  1. वन्यजीव दिखने पर उसे पत्थर न मारें और न ही उसके करीब जाने की कोशिश करें।
  2. शोर मचाकर उसे उकसाने के बजाय तुरंत विभागीय अधिकारियों को सूचित करें।
  3. शाम के समय अकेले सुनसान रास्तों पर जाने से बचें।

फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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