सीएनई संवाददाता, अल्मोड़ा
दिनांक — 1 सितंबर, 2020
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान 1 सितंबर, 1994 में खटीमा में शहीद हुए आंदोलनकारियों को मंगलवार को उत्तराखंड लोक वाहिनी ने याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
खटीमा कांड की याद में एक संवाद गोष्ठी आयोजित कर उत्तराखंड लोक वाहिनी के नेताओं ने कहा कि आज ही के दिन खटीमा में सात लोग ने पुलिस की बर्बरता का सामना करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य व गैरसैण राजधानी ही शहीदों का सपना था। वक्ताओं ने उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाकर वहीं से राज्य का कामकाज चलाने की मांग दोहराई, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों की उपेक्षा के कारण ही उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन की नींव पड़ी। वक्ताओं ने इस बात पर अफसोस व्यक्त किया कि उत्तराख्रंड राज्य तो बन गया, लेकिन आन्दोलन कारियों ने जिस अपेक्षा से संघर्ष किया और शहादत दी, वहां राज्य बन जाने के बाद भी जनमानस उपेक्षित ही रह गया। जबकि बीस साल का सफर तय हो चुका है। उनका कहना था कि गैरसैण को स्थाई राजधानी बना दिया जाता, तो पहाड़ी परिवेश में पहाड़ की समस्याओं का समाधान आसान हो जाता। इस मौके पर शहीद प्रताप सिंह, सलीम अहमद, गोपी चन्द, धर्मानन्द, परमजीत, रामपाल समेत अन्य शहीद राज्य आंदोलनकारियों को भावभीनी श्रद्धांजिल दी गई। गोष्ठी में एडवोकेट जगत रौतेला, पूरन चन्द्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, हरीश मेहता, हारिस मुहम्मद, शमशेर जंग गुरुग, रेवती बिष्ट, कुणाल तिवारी, सुशीला धपोला ने विचार रखे।
अल्मोड़ा : शहीद राज्य आंदोलनकारियों का भावपूर्ण स्मरण, श्रद्धांजलि दी, शहीदों के सपने का राज्य बनाने पर जोर
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