नई उड़ान: एसएसजे विवि व आईएफपी के बीच MOU, रिसर्च साथ और वैज्ञानिक आदान-प्रदान

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एसएसजे विवि व आईएफपी के बीच MOU, रिसर्च साथ और वैज्ञानिक आदान-प्रदान
एसएसजे विवि व आईएफपी के बीच MOU, रिसर्च साथ और वैज्ञानिक आदान-प्रदान

✸ अल्मोड़ा में कुलपति प्रो. बिष्ट तथा आईएफपी के डा. जूलियन मलार्ड ने किए हस्ताक्षर


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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: फ्रेंच इंस्टीट्यूट आफ पांडिचेरी (आईएफपी) और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा अब अनुसंधान, वैज्ञानिक अध्ययन तथा अकादमिक गतिविधियों के क्षेत्र में परस्पर मिलकर काम करेंगे। दोनों एक-दूसरे को सहयोग प्रदान करेंगे। ऐसे समझौते (एमओयू) पर आज यहां हस्ताक्षर हुए। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित कार्यक्रम में समझौते पर कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट और डा. जूलियन मलार्ड-एडम ने हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट और फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी के डॉ. जूलियन मलार्ड-एडम ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर डीन (अकादमिक) प्रो. एके यादव, जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. संदीप कुमार, जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. आरसी मौर्य, जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के डॉ. ललित चंद्र जोशी और जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. अरुण कलखुंडिया भी मौजूद रहे। इस समझौते का उद्देश्य पारस्परिक वैज्ञानिक रुचि के क्षेत्रों में अकादमिक अनुसंधान, वैज्ञानिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और भविष्य के संयुक्त कार्यक्रमों को मजबूत करना है। इसके समझौते के अनुसार दोनों संस्थान अनुसंधान, क्षेत्र-आधारित वैज्ञानिक अध्ययन, छात्र संपर्क और अकादमिक गतिविधियों में मिलकर काम करेंगे।

इस मौके पर कुलपति प्रो. एसपीएस बिष्ट ने कहा कि एसएसजे विश्वविद्यालय प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से विज्ञान और अकादमिक अनुसंधान में सार्थक योगदान का आदान-प्रदान की उम्मीद है। डॉ. जूलियन मलार्ड-एडम ने कुलपति की स्वीकृति से निकट भविष्य में अपने विशेषज्ञता क्षेत्र में स्नातकोत्तर और पीएचडी शोधार्थियों के लिए एक कार्यशाला आयोजित करने पर भी सहमति व्यक्त की है। इससे जैविक कीट प्रबंधन, जैव विविधता और संरक्षण अध्ययन, कीटों के प्रकोप का पारिस्थितिक पूर्वानुमान, पारिस्थितिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों की प्रजातियों में कीट और रोग की गतिशीलता और स्थानिक वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण नियोजन में भविष्य के अनुसंधान कार्यों को समर्थन मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान मौजूद संकाय सदस्यों ने उम्मीद जताई कि समझौता कुमाऊं क्षेत्र और उससे परे दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग, क्षेत्र सत्यापन अध्ययन, जैव विविधता प्रलेखन और अनुप्रयुक्त पारिस्थितिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
डॉ. जूलियन मलार्ड-एडम की उपलब्धि

डॉ. जूलियन मलार्ड-एडम विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक, मैकगिल विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वे वर्तमान में फ्रेंच नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईआरडी), फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। उनका शोध कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित गतिशील वैज्ञानिक मॉडलिंग पर केंद्रित है। उनके कार्य के प्रमुख क्षेत्रों में फसल-कीट अंतःक्रिया और कृषि-पारिस्थितिक खाद्य श्रृंखलाएं शामिल हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं और स्थानीय कृषि समुदायों के लिए कई ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर उपकरण विकसित करके वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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