अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल: मल्ला महल में कला, साहित्य एवं संवाद का अद्भुत संगम

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मल्ला महल में कला, साहित्य एवं संवाद का अद्भुत संगम
मल्ला महल में कला, साहित्य एवं संवाद का अद्भुत संगम

╰┈➤ दूसरे दिन संगीत के सुरमई सुरों, कथावाचन और परिचर्चा से सजा महोत्सव का मंच


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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के ऐतिहासिक मल्ला महल में चल रहे ‘अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल 2026’ के दूसरे दिन कला, साहित्य और संवाद का एक अद्भुत संगम दिखा। दूसरे रोज के सत्रों में एक ओर संगीत की शास्त्रीय परंपराएं गुंजायमान रहीं, तो दूसरी ओर गंभीर साहित्यिक विमर्श ने श्रोताओं को ध्यानमग्न कर दिया।
शास्त्रीय गायन से हुआ कार्यक्रम का आगाज़

दूसरे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत देश के उभरते और प्रख्यात शास्त्रीय गायक हिमांशु दरमोड़ा के गायन और स्वर प्रस्तुति (Vocal Performance) के साथ हुई। उन्होंने रागों के कुशल संयोजन और अपनी सुरीली आवाज़ से मौजूद कला व संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। इससे आध्यात्मिक और संगीतमय वातावरण बन गया।
हीना आलम का भावपूर्ण कथावाचन

संगीत सत्र के बाद जानी-मानी कथावाचक हीना आलम ने मंच संभालते हुए अपनी अनूठी शैली में दिल को छू लेने वाली कहानी प्रस्तुत की। उनका कथावाचन (Storytelling) इतना जीवंत और विचारोत्तेजक (Evocative) था कि हर श्रोता कहानी के पात्रों और संवेदनाओं से सीधे जुड़ गया।
‘कहो कालिदास’ पुस्तक पर गहन मंथन

परिचर्चा सत्र में पहली चर्चा सुप्रसिद्ध लेखक युगल जोशी की पुस्तक ‘कहो कालिदास’ पर केंद्रित रही। जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. दिवा भट्ट और दीपा गुप्ता शामिल रहीं। परिचर्चा में वक्ताओं ने बताया कि युगल जोशी ने कालिदास की प्राचीन रचनाओं को न केवल आज के संदर्भ में व्याख्यायित किया है, बल्कि उन्हें समकालीन पाठकों के लिए बेहद सरल और सुग्राही हिंदी में प्रस्तुत किया है। वक्ताओं ने माना कि यह पुस्तक वर्तमान पीढ़ी को हमारे गौरवशाली साहित्यिक अतीत से जोड़ने में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसके बाद ‘क्लाइमेट फ्यूचर्स एंड ग्लेशियल लॉस’ (जलवायु का भविष्य और हिमनदों का कम होना) विषयक पैनल चर्चा हुई। सत्र की अध्यक्षता प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार रोमोला बुटालिया ने की। जिसमें जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. आईडी. भट्ट, समर्पित पर्वतारोही व अन्नपूर्णा अभियान के उत्तरजीवी अनुराग मालू और पर्वतारोही हर्षित रौतेला ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और वैज्ञानिक शोधों को रेखां​कित करते हुए हिमनदों के सिकुड़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की और वैज्ञानिक ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए नए माध्यमों की जरूरत बताई। पर्वतारोहियों ने कई अनुभव साझा किए।

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