रेस्क्यू सेंटर ने शुरू की पकड़ने की मुहिम
पिंजरे में कैद हुए करीब आधा दर्जन बंदर
कई लोगों को काटकर घायल कर चुके थे उत्पाती बंदर
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। नैनीपुल और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से दहशत का पर्याय बने कटखने बंदरों के आतंक से अब लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों की परेशानी और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद रानीबाग वाइल्डलाइफ ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर की ओर से बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू कर दिया गया है। इसी क्रम में आज नैनीपुल क्षेत्र में पिंजरा लगाकर करीब आधा दर्जन बंदरों को पकड़ा गया। अभियान की शुरुआत से क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बंदरों के आतंक पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।

नैनीपुल और आसपास के इलाकों में कटखने बंदरों की बढ़ती सक्रियता स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई थी। ये बंदर न केवल लोगों को डराने और परेशान करने लगे थे, बल्कि कई लोगों को काटकर घायल भी कर चुके थे। बंदरों के इस व्यवहार के कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ था। खासकर रोजमर्रा के कामकाज के लिए घरों से बाहर निकलने वाले लोगों को इनके हमले का डर सताता रहता था।
समस्या की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनूप सिंह जीना ने वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष इस मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने डीएफओ नैनीताल तथा वन क्षेत्राधिकारी नथुवाखान से क्षेत्र में पिंजरा लगाकर कटखने बंदरों को पकड़ने की मांग की थी, ताकि स्थानीय लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके।
वन विभाग की पहल से शुरू हुई कार्रवाई
अनूप सिंह जीना की मांग के बाद नैनीपुल में रानीबाग वाइल्डलाइफ ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया। अभियान के दौरान पिंजरे में करीब आधा दर्जन बंदर पकड़े गए। इस कार्रवाई को क्षेत्र में बंदरों के आतंक से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
अभियान में अनुभाग अधिकारी प्रदीप मौर्य, वन आरक्षी अनिल बोरा, रेस्क्यू सेंटर के गिरीश पलड़िया एवं मनोज जोशी ने सहयोग दिया। वहीं, ग्राम प्रधान सिरसा भुवन चंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता विपिन गुरुरानी, नवीन तिवारी और चंद्र प्रकाश जीना सहित अन्य लोगों ने भी अभियान में सहभागिता निभाई।
स्थानीय लोगों को राहत की उम्मीद
कटखने बंदरों के आतंक से परेशान क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वन विभाग की यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और समस्या का स्थायी समाधान निकालने में मदद मिलेगी। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों की बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है, ताकि वे बिना किसी भय के अपने दैनिक कार्य कर सकें।
नैनीपुल में शुरू हुआ यह अभियान स्थानीय लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों से जुड़ी समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें वन विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे बंदरों के आतंक से प्रभावित अन्य इलाकों में भी राहत मिल सके।










