मुंबई बम ब्लास्ट, बड़ा सवाल : तो 189 लोगों को किसी ने नहीं मारा, सभी बरी ?

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मुंबई बम ब्लास्ट, बड़ा सवाल : तो 189 लोगों को किसी ने नहीं मारा, सभी बरी ?
मुंबई बम ब्लास्ट, बड़ा सवाल : तो 189 लोगों को किसी ने नहीं मारा, सभी बरी ?

पीड़ित परिवारों ने कहा कि फैसले ने हमें भीतर तक तोड़ दिया

SO NO ONE KILLED 189 PEOPLE?


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189 innocents were killed in the 2006 Mumbai blasts. All 12 accused have now been acquitted by the High Court.

CNE DESK/फ्लैश बैक में जायें तो गत 11 जुलाई, 2006 में मुंबई में शाम पांच बजे बहुत भयानक घटित हुआ था। लोकल ट्रेन में धड़ाधड़ बम ब्लॉस्ट हुए और 189 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह एक बहुत बड़ी आतंकवादी घटना थी। पुलिस और जांच ऐजेंसियों ने जिन आरोपियों को पकड़ा उनमें से एक बहुत पहले बरी हो गया था, एक की मौत हो गई और बाकी 12 को कोर्ट ने बरी कर दिया।

मुंबई बम ब्लास्ट के सभी आरोपी कोर्ट से बरी –

घटना प्रभावित लोगों का कहना है कि उस दिन मुंबई की 7 लोकल ट्रेनों में धमाके हुए थे। 189 लोगों की जान चली गई और 824 गंभीर रूप से घायल हुए। उनमें से बहुत सारे आज भी अपंगता का जीवन जी रहे हैं।

ट्रेन धमाकों का दर्द तो जिंदा बचे पीड़ित सह गए, लेकिन जब कोर्ट से 12 आरोपी बरी हुए तो इस दर्द को घटना प्रभावित लोग सह पाने में खुद को असमर्थ मानते हैं।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इस ब्लास्ट के 19 साल बाद 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। जिसके बाद बड़ा सवाल यह है कि अगर यह सभी लोग निर्दोष थे, तो असली गुनाहगार कौन थे। तो क्या मुंबई हमले में 189 लोगों की जान लेने वाले और 824 को बम धमाकों से घायल करने वाले आतंकवादी आज मौज से घूम रहे हैं ?

पीड़ित लोगों का साफ कहना है कि उन्हें जितना बड़ा धक्का धमाके से लगा था, उतना ही अब इस फैसले से लगा है। वहीं बरी हुए लोगों के परिवारों में खुशी का माहौल है। इनका कहना है कि अब इतने सालों से उन पर लगा आतंकी होने का तमगा हट गया है।

ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा : वकील ताहिरा कुरैशी

आरोपियों की वकील ताहिरा कुरैशी कहती हैं, ‘इस फैसले से हम बहुत खुश हैं। खासकर तब जब निचली अदालत ने कुछ लोगों को फांसी तक की सजा सुना दी थी। ये सच है कि न्याय मिलने में बहुत देरी हुई, लेकिन हम शुक्रगुजार हैं कि आखिरकार सच की जीत हुई। मेरे मुवक्किल निर्दोष साबित हुए।‘

‘मेरे मुवक्किल को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि वे इस साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने विदेश जाकर ट्रेनिंग ली थी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब वे एक सामान्य परिवार के सिर्फ 25-26 साल के युवक थे। उन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक हमेशा यही कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। असली गुनहगारों को न पकड़ पाने की नाकामी में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है। उन्होंने आगे कहा, ‘ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा और एक बहुत बड़ा सबक है। हमें अपने मुवक्किलों के बरी होने की खुशी है।‘

मुंबई बम ब्लास्ट के फैसले पर पूर्व प्रकाशित ख़बर —

महाराष्‍ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में अब महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। शीर्ष कोर्ट में 24 जुलाई को सुनवाई होगी। महाराष्‍ट्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की अपील की थी।

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