छात्रा से बैड टच ! समर वैली स्कूल में बवाल ! टीचर पर FIR

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छात्रा से बैड टच ! समर वैली स्कूल में बवाल ! टीचर पर FIR
छात्रा से बैड टच ! समर वैली स्कूल में बवाल ! टीचर पर FIR

CNE REPORTER, देहरादून। राजधानी देहरादून के प्रतिष्ठित समर वैली स्कूल में कक्षा 11 की एक छात्रा के साथ कथित अनुचित स्पर्श का मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रा की शिकायत के अनुसार, शिक्षक पर आरोप लगाने के बाद उसे न्याय दिलाने के बजाय कथित तौर पर चुप रहने का दबाव बनाया गया। छात्रा ने स्कूल के डायरेक्टर अशोक वासु पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने और उसके साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।


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मामला तब और गंभीर हो गया, जब अपनी बेटी को न्याय दिलाने स्कूल पहुंची मां और छात्रा को कथित तौर पर कई घंटे तक स्कूल परिसर से बाहर नहीं जाने दिया गया। इस दौरान मीडिया कर्मियों को भी प्रवेश नहीं मिलने तथा शिकायत की प्रति मांगने पर पत्रकारों और स्कूल प्रबंधन के बीच तीखी बहस होने के आरोप सामने आए हैं। अब पीड़ित छात्रा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने आरोपी भौतिक विज्ञान शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। वहीं, आरोपों से घिरे शिक्षक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई देते हुए कहा है कि उनके 25 साल के शिक्षण करियर में पहली बार इस तरह का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए महिला अधिकारी को नियुक्त किया है।

15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाली शिकायत से शुरू हुआ मामला

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को हुई, जब समर वैली स्कूल में कक्षा 11 की एक छात्रा ने अपने भौतिक विज्ञान के शिक्षक पर अनुचित तरीके से स्पर्श करने का आरोप लगाया। छात्रा का कहना है कि संबंधित शिक्षक उसकी कक्षा के क्लास टीचर भी हैं और कथित तौर पर लड़के-लड़कियों के साथ अनुचित व्यवहार करते थे।

छात्रा के मुताबिक, उसने हिम्मत जुटाकर अन्य छात्राओं से बातचीत की और 15 छात्राओं के हस्ताक्षर के साथ एक लिखित शिकायत स्कूल प्रबंधन को सौंपी। आरोप है कि उस समय प्रिंसिपल ने शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई करने और उन्हें नौकरी से हटाने का भरोसा दिया। हालांकि, छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उसे इस मामले की जानकारी अपने घर में किसी को नहीं देने के लिए कहा गया।

अगले दिन भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

छात्रा के अनुसार, 16 अक्टूबर को जब वह स्कूल पहुंची, तो उसे शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी। इसके बाद उसे प्रिंसिपल के कार्यालय में बुलाया गया। छात्रा के मुताबिक, वहां स्कूल के डायरेक्टर अशोक वासु, प्रिंसिपल और एक अन्य महिला शिक्षिका मौजूद थीं।

छात्रा ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान डायरेक्टर ने उसके पिता का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की और शिक्षक द्वारा कथित तौर पर गलत जगह छूने की बात कहने पर उससे उसी स्थान को छूकर दिखाने के लिए कहा। छात्रा के अनुसार, डायरेक्टर ने उस पर अन्य विद्यार्थियों से जबरन हस्ताक्षर करवाने का आरोप भी लगाया और कहा कि कोई उसका साथ नहीं देगा।

छात्रा का कहना है कि इस बातचीत से वह बेहद डर गई और मानसिक रूप से परेशान होकर उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। हालांकि, इन आरोपों पर स्कूल डायरेक्टर का पक्ष सामने आना और जांच में तथ्यों की पुष्टि होना आवश्यक है।

मां को बताई आपबीती, बेटी के साथ स्कूल पहुंचकर मां ने मांगा जवाब

स्कूल में हुई कथित घटनाओं से परेशान छात्रा ने आखिरकार अपनी मां को पूरी बात बताई। इसके बाद शुक्रवार सुबह मां अपनी बेटी के साथ स्कूल पहुंचीं और प्रबंधन से पूरे मामले पर जवाब मांगा।

परिवार का आरोप है कि शिकायत पर संतोषजनक जवाब देने के बजाय स्कूल प्रबंधन ने मां-बेटी के साथ सख्त और धमकी भरा व्यवहार किया। आरोप यह भी है कि दोनों को कई घंटे तक स्कूल के भीतर रोके रखा गया और बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

बताया गया कि इस दौरान डालनवाला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) की टीम भी स्कूल पहुंची और बंद कमरे में प्रबंधन के साथ बातचीत करती रही। मां-बेटी के बाहर नहीं आने पर उनकी ओर से मीडियाकर्मियों से मदद मांगी गई। आरोप है कि पत्रकारों के पहुंचने के बावजूद स्कूल का मुख्य द्वार नहीं खोला गया और छुट्टी के बाद ही मां-बेटी को बाहर जाने दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और अभिभावकों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत की प्रति नहीं देने और CCTV फुटेज हटाने के आरोप

मामले में विवाद उस समय और बढ़ गया, जब पीड़ित छात्रा के परिजनों ने 15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाली मूल शिकायत की प्राप्ति रसीद अथवा उसकी फोटोकॉपी मांगी। परिवार के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने उन्हें शिकायत की प्रति उपलब्ध नहीं कराई।

इस मुद्दे पर मौके पर मौजूद पत्रकारों और स्कूल के प्रिंसिपल के बीच तीखी बहस होने की बात भी सामने आई है। बताया जाता है कि पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद छात्रा को कागज और पेन उपलब्ध कराया गया, ताकि वह अपनी शिकायत दोबारा लिख सके।

परिजनों और पत्रकारों ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने की आशंका भी जताई है। हालांकि, फुटेज वास्तव में हटाए गए हैं या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। जांच में स्कूल के सीसीटीवी रिकॉर्ड, शिकायत से संबंधित दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

SSP को लिखित शिकायत, शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज

घटनाक्रम के बाद पीड़ित छात्रा ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल को लिखित शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल के अनुसार, मामले की जांच के लिए महिला पुलिस अधिकारी को नियुक्त किया गया है। पुलिस जांच में छात्रा के आरोपों, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अब केवल शिक्षक पर लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। शिकायत मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए, छात्रा के साथ हुई कथित बातचीत की परिस्थितियां क्या थीं और मां-बेटी को स्कूल परिसर में रोके जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है, इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

शिक्षक ने दी सफाई, कहा—25 साल में पहली बार लगा ऐसा आरोप

आरोपी भौतिक विज्ञान शिक्षक रवींद्र भृगु ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने पक्ष में सफाई दी है। शिक्षक ने कहा कि उनके 25 साल के शिक्षण करियर में पहली बार किसी ने उन पर इस तरह का आरोप लगाया है।

वीडियो में शिक्षक ने कहा कि वह बच्चों को अपने बेटे-बेटी के समान मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जाने-अनजाने उनसे कोई त्रुटि हुई है, तो वह तहे दिल से क्षमा मांगते हैं।

शिक्षक की इस प्रतिक्रिया के बाद अब पुलिस जांच का महत्व और बढ़ गया है। एक ओर छात्रा और उसके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक ने अपना पक्ष रखा है। ऐसे में सभी पक्षों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य उपलब्ध तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

स्कूल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

मामले को लेकर स्कूल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्कूल में इस तरह का व्यवहार लंबे समय से चल रहा था और प्रबंधन को इसकी जानकारी थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

प्रदर्शन के दौरान छात्राओं की सुरक्षा, शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही का मुद्दा उठाया गया। मामले ने शहर में शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर फिर से चर्चा शुरू कर दी है।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

समर वैली स्कूल प्रकरण में अब कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आने चाहिए। यदि छात्रा ने 15 अक्टूबर को लिखित शिकायत दी थी, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायत की विधिवत प्राप्ति दर्ज की गई थी? छात्रा को घर पर जानकारी नहीं देने के लिए कहे जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या 16 अक्टूबर को हुई बैठक में डायरेक्टर ने छात्रा के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया? मां-बेटी को स्कूल में रोके जाने की परिस्थितियां क्या थीं? और क्या घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित हैं?

इन सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष जांच, संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाने से ही मिल सकता है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि

इस प्रकरण में पीड़ित छात्रा के परिवार की मांग है कि स्कूल के डायरेक्टर अशोक वासु सार्वजनिक रूप से और स्कूल की असेंबली में विद्यार्थियों के सामने माफी मांगें। परिवार चाहता है कि बच्चों को यह भी बताया जाए कि किसी शिक्षक या अन्य व्यक्ति द्वारा अनुचित व्यवहार किए जाने पर वे बिना डर अपने अभिभावकों और जरूरत पड़ने पर पुलिस को इसकी जानकारी दे सकते हैं।

हालांकि, सार्वजनिक माफी और अन्य मांगों पर फैसला संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा मामले के तथ्यों के सामने आने के बाद ही हो सकता है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए, उसकी पहचान और गरिमा की रक्षा हो तथा जांच किसी दबाव के बिना पूरी की जाए।

शिक्षण संस्थान बच्चों के ज्ञान, व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण के केंद्र होते हैं। ऐसे संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, उनकी बात सुनने की व्यवस्था और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है। समर वैली स्कूल का यह मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है। उम्मीद है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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