दो हजार मौतें और हर तरफ तबाही का मंजर, बेहद दुःखद खबर…

रबात | मोरक्को में शुक्रवार की रात आये शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हजार से अधिक हो गई है। इस बीच…

दो हजार मौतें और हर तरफ तबाही का मंजर, बेहद दुःखद खबर…

रबात | मोरक्को में शुक्रवार की रात आये शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हजार से अधिक हो गई है।

इस बीच मोरक्को में शनिवार से तीन दिन का राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। मोरक्को के किंग मोहम्मद चतुर्थ ने विनाशकारी आपदा पर कल बैठक बुलाई। बैठक में राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई। शाही कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार राष्ट्रीय शोक के दौरान सभी सार्वजनिक स्थलों पर झंडे आधे झुके रहेंगे।

देश के गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2012 हो गई है जबकि 2059 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 1404 की हालत गंभीर है।

भूकंप की तीव्रता 7.2 थी

मोरक्को जियोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 7.2 थी। हालांकि, US जियोलॉजिकल सर्वे ने इसकी तीव्रता 6.8 बताई है। साथ ही कहा कि ये इस इलाके में 120 साल में आया सबसे ताकतवर भूकंप है। मोरक्को के स्टेट टेलीविजन ने बताया कि भूकंप की वजह से कई इमारतें ढह गईं हैं। भूकंप का एपिसेंटर एटलस पर्वत के पास इघिल नाम का गांव बताया गया, जो माराकेश शहर से 70 किलोमीटर की दूरी पर है। भूकंप की गहराई जमीन से 18.5 किलोमीटर नीचे थी। पुर्तगाल और अल्जीरिया तक भूकंप के झटके महसूस किए गए।

UNESCO की विश्व धरोहर स्थल को भी पहुंचा नुकसान

UNESCO की विश्व धरोहर स्थल ऐतिहासिक माराकेश में पर्यटकों का ध्यान खींचने वाली लाल दीवारों के कुछ हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। स्थानीय टीवी चैनल के मुताबिक इस भूकंप में शहर की कुतुबिय्या मस्जिद का मीनारा ढह गया है। यह मस्जिद यूनेस्को की हेरीटेज साइट थी। जिसकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

भारत, अमेरिका, अरब लीग, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, फिलिस्तीन, सऊदी अरब, कतर, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, लेबनान, लीबिया, ईरान, तुर्किये, इज़राइल, फ्रांस और जर्मनी तथा अन्य देशों एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मोरक्को को सहायता की पेशकश की है।

जाने भूकंप कैसे आता है?

हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। इससे जमीन में फॉल्ट लाइन्स बनती हैं।

अब तीन तरह की फॉल्ट लाइन्स के बारे में जानें…

1- रिवर्स फॉल्ट- भूकंप के दौरान जमीन का एक हिस्सा ऊपर की तरफ उठता है।
2- नॉर्मल फॉल्ट- इस फॉल्ट में जमीन का एक हिस्सा नीचे की तरफ जाता है।
3- स्ट्राइक स्लिप फॉल्ट- टेक्टोनिक प्लेट्स में घर्षण होने की वजह से जमीन का एक हिस्सा आगे या पीछे की तरफ खिसकता है।

2011 में जापान में आए भूकंप से धरती खिसक गई थी

11 मार्च 2011 को जापान में 9.1 तीव्रता का अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया था। इस भूकंप ने न सिर्फ लोगों की जान ली, बल्कि धरती की धुरी को 4 से 10 इंच तक खिसका दिया था। साथ ही पृथ्वी की रोजाना चक्कर लगाने की रफ्तार में भी वृद्धि हुई।

उस वक्त USGS के सीस्मोलॉजिस्ट पाल अर्ले ने कहा था कि इस भूकंप ने जापान के सबसे बड़े द्वीप होन्शू को अपनी जगह से करीब 8 फीट पूर्व की तरफ खिसका दिया है। इस दौरान पहले 24 घंटे में 160 से ज्यादा भूकंप के झटके आए थे। इनमें से 141 की तीव्रता 5 या इससे ज्यादा थी। जापान में आए इस भूकंप और सुनामी ने 15 हजार से ज्यादा लोगों की जान ली थी।

जापान भूकंप के सबसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र में है। यह पैसेफिक रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आता है। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टैक्टोनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं।

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