आवास विकास कालोनी की जनता भी हुई मुखर
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। घरों के बाहर लगे लाल निशान का मुद्दा अब सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है। विधायक सुमित ह्रदयेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन 1960 के पुराने नक्शों का हवाला दे रहा है और 10 मीटर चौड़े नाले की बात कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1960 में तो हल्द्वानी का अधिकांश हिस्सा जंगल था। तो क्या अब सरकार द्वारा हल्द्वानी को फिर से जंगल में तब्दील करने की योजना बनायी जा रही है। उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा में उठाने की बात भी कही।
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा है कि हल्द्वानी में कई घरों पर प्रशासन द्वारा लाल निशान लगाए गए हैं, जिससे आम जनता के बीच डर पैदा हो गया है। यह एक सोची-समझी रणनीति लगती है जिसके ज़रिए सरकार प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर जनता पर मानसिक दबाव बना रही है।
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि यह सिर्फ़ घरों पर निशान नहीं हैं, बल्कि हज़ारों लोगों की उम्मीदों, सपनों और खून-पसीने से बने आशियानों पर हमला है। एक घर को बनाने में व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी लग जाती है, वह खून पसीने की कमाई लगा कर अपने और अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित स्थान तैयार करता है। ऐसे में इन लाल निशानों के ज़रिए प्रशासन क्या संदेश देना चाहता है।
विधायक ने कहा आज जिन मकानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहाँ लोग आज़ादी के समय से रह रहे हैं। कुछ स्थानों पर तो दूसरी और तीसरी पीढ़ियाँ बस चुकी हैं। अब अचानक इस तरह का अमानवीय रवैया अपनाना दर्शाता है कि यह पूरी प्रक्रिया साज़िशपूर्ण प्रतीत होती है।

क्या बोले आवास विकास कॉलोनी के लोग !
उधर आज भी लाल निशान का मुद्दा आवास विकास कॉलोनी में गर्म रहा। यहां के वाशिंदों का कहना है कि 1930 के नक्शे के आधार पर नहीं आवास विकास परिषद द्वारा आवंटित कॉलोनी के नक्शे के आधार पर नाले का सर्वे होना चाहिए।
आवास विकास परिषद कार्यालय से 35 साल की सेवा के बाद सेवानिर्वित्त हुए इंद्रमन मौर्या ने बताया कि आवास विकास परिषद कार्यालय द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी की संस्तुति पर ही उन्हें सन 1980 में आवास विकास के मकान अलॉट हुए हैं और अब प्रशासन हिटलर शाही अंदाज में आजादी से पूर्व सन 1930 के नक्शे को आधार बनाकर सर्वे कर उनके घरों में लाल निशान पोत रहा है। जो बिल्कुल ही औचित्यहीन है।
उन्होंने कहा सरकारी नियमों का पालन कर हमने जीवन भर की पूंजी लगा अपने घर बनाए है, अब भला इन्हें कैसे अतिक्रमण मानकर वर्तमान जिला प्रशासन तोड़ने को लाल निशान लगा रहा है।
स्थानीय महिला मीरा पांडे ने कहा कि जब वर्तमान डीएम ने उनके साथ बैठक कर उनसे आपत्ति लेकर 13 अगस्त तक निस्तारण का समय दिया था तो आखिर फिर किसके इशारों पर ये 15 जुलाई को ही अधिकारी घरों पर बिना आपत्ति निस्तारण के लाल निशान लगा रहे है। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा महीने भर के भीतर किए गए दो सर्वे की बिल्कुल ही अलग रिपोर्ट आने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपनी इस जायज मांग के लिए जरूरत पड़ने पर न्यायालय जाने की भी बात कही।
स्थानीय महिला विमला देवी ने कहा कि अगर जिला प्रशासन को सर्वे ही करवाना है तो 1930 के नक्शे के आधार न मानकर आवास विकास परिषद कार्यालय से नक्शा लेकर सर्वे किया जाए।

