अल्मोड़ा में छायांकन दिवस पर डॉ. मिराल का विशेष व्याख्यान
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
उदय शंकर फोटोग्राफी एकेडमी अल्मोड़ा द्वारा विश्व छायांकन दिवस के अवसर पर फोटो टॉक का आयोजन अल्मोड़ा किताब घर में किया गया। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह मिराल ने “गंगोत्री घाटी में पिघलते ग्लेशियर एवं जलवायु परिवर्तन के संकेत” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

डॉ. मिराल ने बताया कि उन्होंने पिछले 12 वर्षों से गंगोत्री ग्लेशियर और उच्च हिमालयी क्षेत्र का गहन अध्ययन किया है। स्लाइड शो और आकर्षक तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने गंगोत्री, रक्तवर्ण, ठेलू और चतुरंगी ग्लेशियरों के तेजी से पीछे खिसकने की तस्वीरें प्रस्तुत कीं।
ग्लेशियरों के पिघलने की गति पर चौंकाने वाले खुलासे
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में ग्लेशियरों के पिघलने और पीछे हटने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी है, जबकि स्थानीय स्तर पर बर्फबारी में कमी ने इस खतरे को और बढ़ाया है।

व्याख्यान में बताया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में बादल फटना, अचानक अतिवृष्टि और ग्लेशियर झील फटने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। यह स्थिति केवल उत्तराखंड के धराली तक सीमित नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, कुल्लू, मंडी और जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में भी देखी जा रही है।
डॉ. मिराल ने चेताया कि हिमालयी नदियों और नालों के किनारे होटलों, दुकानों और भवनों का अनियंत्रित निर्माण आपदाओं का बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की क्षमता से अधिक पर्यटकों का दबाव स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद हानिकारक है।

कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक मनमोहन चौधरी ने विचार रखे। संचालन जयमित्र बिष्ट ने किया और समापन की घोषणा संस्था उपाध्यक्ष चेतन कपूर ने की।
कार्यक्रम में भरत साह, मनमोहन चौधरी, चेतन कपूर, गीता जोशी, डॉ. इन्दिरा बिष्ट, अविरल, रमीज खान, वैभव जोशी, नितिन पाण्डेय, हेम रौतेला, सारांश मगोंली, इशू चौधरी, कर्नल विजय मनराल, डॉ. पूरन जोशी, भूपेंद मोहन पंत, वीरेंद्र सिंह सिजवाली, राजेश आर्य सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

