AgricultureNainitalPoliticsUttarakhand

तीनों कृषि कानून हटाओ, गरीब-गुरबों और आमजन की रोटी बचाओ” नारे के साथ “किसान यात्रा” शुरू

लालकुआं । टिहरी राजशाही के खिलाफ क्रांतिकारी किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कामरेड नागेन्द्र सकलानी के शहादत दिवस 11 जनवरी से किसान महासभा द्वारा “किसान यात्रा” शुरू की गई। कार रोड चौराहे पर क्रांतिकारी कामरेड नागेन्द्र सकलानी व कामरेड मोलू भरदारी को श्रद्धांजलि देते हुए “किसान यात्रा” की शुरूआत हुई। जनविरोधी – किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर चल रहे राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए अखिल भारतीय किसान महासभा की “किसान यात्रा” को रवाना करते हुए किसान महासभा के वरिष्ठ नेता कामरेड बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि, “दिल्ली में इतनी ठंड में चल रहे राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन में 70 से अधिक सत्याग्रही किसानों की शहादत हो चुकी है परन्तु हमारे कृषि मंत्री और मोदी सरकार कारपोरेट के आगे नतमस्तक होकर किसानों का हितैषी होने का झूठ फैला कर किसान – जन विरोधी कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने की बात बड़ी बेशर्मी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, “मोदी और मोदी सरकार का झूठ अब और अधिक नहीं चलने वाला अब मोदी सरकार को किसानों को भ्रमित करने के भ्रम को छोड़कर तीनों कानूनों को रद्द करना ही होगा क्योंकि अब देश का किसान – मजदूर, नौजवान, अपने खेत – खेती, रोटी और गांव – घरों को बचाने के लिए अपने द्वारा अपने लिए चुनी हुई सरकार की हेकड़ी को धराशाई करने अपने घरों से बाहर निकल आया है। उन्होंने कहा कि, “आंदोलनकारियों के साथ दुश्मनों सा बर्ताव कर सरकार ने “मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊं” को चरितार्थ किया है।”
“किसान यात्रा” को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि, “हरियाणा के मुख्यमंत्री की किसान महापंचायत का विरोध 25 नवम्बर को हरियाणा सरकार द्वारा पूर्व निर्धारित दिल्ली चलो कार्यक्रम को कुचलने के लिए शान्तिपूर्ण ढंग से चल रहे आंदोलनकारियों से अश्रु गैस, वॉटर कैनन, लाठीचार्ज के साथ-साथ सड़क खोदकर गड्ढे बनाना, बैरिकेडिंग के साथ कटीले तारों की बाड़ लगाकर आक्रांताओं की भांति व्यवहार से उपजे आक्रोश की परिणति था, जिसने ब्रिटिश कम्पनी राज की याद को ताजा कर दिया था।” उन्होंने कहा कि, “आंदोलनकारियों के साथ मोदी सरकार का विदेशी आक्रांताओं सा व्यवहार से देश के किसान और जनता समझ गई है कि मोदी सरकार कारपोरेटपरस्त नीतियां बनाकर देश को फिर से कंपनी राज का गुलाम बनाना चाहती है इसी का नतीजा है कि पूरे देश के किसान ही नहीं आमजन भी इस किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर किसानों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को समर्थन दे रहा है।”
उन्होंने किसान यात्रा को “तीनों कृषि कानून हटाओ ! गरीब-गुरबों और आमजन की रोटी बचाओ !” का नारा देकर अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से आम जन – जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
भाकपा (माले) जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “11 जनवरी 1948 को हुई कामरेड नागेन्द्र सकलानी की शहादत उत्तराखण्ड के इतिहास में राजाओं-सामंतों के खिलाफ़ किसान संघर्षों की लम्बी परंपरा का चरम था, उनकी शहादत ने टिहरी राजशाही के ताबूत में अंतिम कील ठोकने का काम किया। उत्तराखण्ड में जनता के संघर्ष को आगे बढ़ा रहे क्रांतिकारी-कम्युनिस्टों को जरूर ही उत्तराखंड के सामंतवाद विरोधी-उपनिवेशवाद विरोधी किसान संघर्षों के इतिहास की विरासत को प्रतिष्ठित करना होगा। उत्तराखण्ड में क्रांतिकारी संघर्षों को आगे बढ़ाने में यह महत्वपूर्ण साबित होगा।”
“किसान यात्रा” पहले दिन कार रोड से शुरू हुई जहां से जनसंपर्क करते हुए आदर्श गांव, गौला गेट, इंद्रानगर, ट्राली लाइन आदि में किसान आंदोलन के पक्ष में पर्चा वितरण, नुक्कड़ सभाएं की गई। जिसमें मुख्य रूप से आनन्द सिंह नेगी, बहादुर सिंह जंगी, डॉ कैलाश पाण्डेय, भुवन जोशी, ललित मटियाली, गोविंद सिंह जीना, राजेन्द्र शाह, किशन बघरी, विमला रौथाण, बिशन दत्त जोशी, गोपाल गड़िया, धीरज कुमार, आनंद सिंह दानू, पनिराम, त्रिलोक राम, शिवा कोरंगा, निर्मला देवी, त्रिलोक सिंह दानू, दौलत सिंह कार्की आदि शामिल रहे। ‘किसान यात्रा’ 11 जनवरी से 25 जनवरी तक चलेगी तत्पश्चात 25 को शहीद स्मारक पर “किसान रैली” की जायेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Back to top button
किचन गार्डन में जरूर लगाएं ये पौधे, सेहत के लिए भी फायदेमंद Uttarakhand : 6 PCS अधिकारियों के तबादले शाहरूख खान की फिल्म डंकी 100 करोड़ के क्लब में शामिल हिमाचल में वर्षा, बर्फबारी होने से बढ़ी सर्दी Uttarakhand Job : UKSSSC ने निकाली 229 पदों पर भर्ती