राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : गरुड़ तहसील के लोहारचौंरा क्षेत्र के लिए रविवार का दिन अत्यंत भावुक रहा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. लक्ष्मी दत्त कांडपाल की धर्मपत्नी और 90 वर्षीया वीरांगना जानकी देवी अब हमारे बीच नहीं रहीं। शनिवार देर रात उनके निधन की सूचना मिलते ही समूचे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को सरयू-गोमती के पावन संगम पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।


लोहारचौंरा गांव की निवासी जानकी देवी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। उनका उपचार टीट बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उनके पौत्र ललित कांडपाल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि शनिवार की रात करीब 11 बजे उन्होंने टीट बाजार स्थित अपने निजी आवास पर अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे एक भरा-पुरा परिवार और गौरवशाली विरासत छोड़ गई हैं।
रविवार सुबह जैसे ही उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई, क्षेत्र के सैकड़ों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। बागेश्वर के सरयू-गोमती संगम तट पर प्रशासन की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया। पुलिस बल ने उन्हें सलामी दी और नम आंखों से विदाई दी गई। गरुड़ के प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह भाकुनी और बागेश्वर की तहसीलदार ऋतु गोस्वामी ने प्रशासन की ओर से वीरांगना के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति
जानकी देवी केवल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पत्नी ही नहीं, बल्कि अपने सरल, सौम्य स्वभाव और सामाजिक सरोकारों के कारण क्षेत्र में एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में पहचानी जाती थीं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनका निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष और सादगी की जो मिसाल पेश की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
उनकी अंतिम यात्रा और संगम तट पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। इस दुखद अवसर पर पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट, और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी सहित कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और वीरांगना के योगदान को याद किया।


