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अल्मोड़ा : Brown Wood Owl का घायल हुआ बेबी (owlet), सफल रेस्क्यू

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📌 यहां रहता है यह उल्लू परिवार

✒️ जानिए इस बेहद खूबसूरत पक्षी के बारे में

Story of successful rescue of brown baby owl injured in monkey attack.

CNE ALMORA. अल्मोड़ा नगर क्षेत्र में लंबे समय से एक ब्राउन वुड आउल परिवार (Brown Wood Owl Family) र​ह रहा है। आज सोमवार को एक बेबी आउल (Owlet) घायल हो गया। मां के संरक्षण में रह रहा यह बेबी जब उड़ने का प्रयास कर रहा था, तभी घोंसले से नीचे जा गिरा। इस बीच बंदर इस पर झपट पड़े और उसे चोटिल कर दिया। तभी कुछ पक्षी प्रेमियों ने इसे न केवल बंदरों से बचाया, बल्कि निकटवर्ती पशु अस्पताल तक भी ले गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की ओर से इस बेबी आउल (Baby Owl) का रेस्क्यू किया गया।

लंबे समय से निवासरत है Brown Wood Owl परिवार

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उल्लेखनीय है कि अल्मोड़ा के हॉलिडे होम (KMVN Holiday Home Almora) में विगत वर्ष लॉक डाउन के दौर से उल्लूओं का एक परिवार रह रहा है। पर्यावरण व प्रकृति प्रेमी जयमित्र बिष्ट इन पक्षियों से विशेष लगाव रखते हैं और अकसर इनसे मिलने आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह ब्राउन वुड आउल (Brown wood owl) परिवार बीच-बीच में प्रवास के लिए यहां आता रहता है। खास तौर पर मार्च से मई माह के बीच प्रजनन के लिए हॉलीडे होम पहुंचता है। यहां यह कुमाऊं मंडल विकास निगम के हॉलीडे होम के बाहरी परिसर में एक स्थान पर रह रहा था।

बच्चे के साथ रह रही है मां, बेबी आउल के साथ हुआ यह हादसा

आज सोमवार 05 मई को यहां एक घटना घट गई। कुछ समय पूर्व उल्लू माता ने एक बच्चे को जन्म दिया था। यह बच्चा (owlet) आज जब उड़ने की कोशिश कर रहा था। तभी इसी कोशिश में नीचे गिर गया। इस बीच वहां मौजूद बंदरों ने इस पर हमला कर दिया।

KMVN स्टॉफ ने की मदद, बचाई जान

इस बीच वहां रह रहे कुमाऊं मंडल विकास निगम के स्टॉफ ने इस बेबी आउल की मदद की। पहले इन्होंने इसे परिसर में ही पानी पिलाया व कुछ खाने को दिया। फिर पशु चिकित्सालय ले गये। जहां owlet का प्राथमिक उपचार कराया गया।

वन दरोगा भुवन लाल टम्टा ने किया रेस्क्यू

इस बीच सूचना मिलने पर प्रकृति प्रेमी जयमित्र बिष्ट ने तत्काल वन विभाग को फोन किया। जिसके बाद विभाग के वन दरोगा भुवन लाल मौके पर पहुंचे। दोपहर करीब 01 बजे इस Baby Owl का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। वन दरोगा भुवन लाल ने बताया कि इसे रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। जब यह बच्चा स्वस्थ हो जायेगा। तो इसे दोबारा इसकी मां के पास छोड़ दिया जायेगा।

बेहद खूबसूरत पक्षी है यह : जयमित्र बिष्ट

प्रकृति प्रेमी जयमित्र बिष्ट ने बताया कि वह इन पंछियों से खासा लगाव रखते हैं। यही कारण है कि समय-समय पर वह इनके फोटो खींचते रहे। उन्होंने बताया कि यह काफी खूबसूरत पक्षी है। कुमाऊं मंडल के रेस्ट हाऊस के बाहरी परिसर में खिड़की ऊपर स्लैप पर रह रहा था। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी यहां कई उल्लू देखे गये हैं। फिलहाल इस बेबी आउल के पैर में चोट है। उन्हें उम्मीद है कि यह जल्द स्वस्थ हो जायेगा। यदि इसकी मां यहां रही तो फिर उसके संरक्षण में दोबारा बच्चे को सौंप दिया जायेगा।

ब्राउन वुड आउल के बारे में यह भी जानिए

इसे हिंदी में भूरे रंग का लकड़ी वाला उल्लू कह दिया जाता है। यह भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, ताइवान और दक्षिण चीन में मिलते हैं। ब्राउन वुड उल्लू दक्षिण एशिया का मूल निवासी है। यह उल्लू करीब 45-57 सेमी का होता है। ऊपरी हिस्से गहरे भूरे रंग के होते हैं। साथ ही कंधों पर हल्के सफेद धब्बे होते हैं। आंखें गहरे भूरे रंग की होती हैं। अन्य उल्लू प्रजाति की तहर ही यह प्रजाति भी निशाचर है। ब्राउन वुड उल्लू के आहार में मुख्य रूप से छोटे जीव, पक्षी और सरीसृप होते हैं।

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SOURCE: YOUTUBE SHORTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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