नौतपा से पहले ही रिकॉर्ड 48°C पारा
बांदा की वजह से वैश्विक सूची में तीसरे स्थान पर पहुंचा भारत
एम्स दिल्ली ने जारी की एडवायजरी
जानिए, अगले दिनों के मौसम का पूर्वानुमान
CNE DESK : भारतीय उपमहाद्वीप इस समय प्रकृति के भीषणतम प्रकोप का सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। वर्तमान स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि विश्व के सर्वाधिक गर्म देशों की सूची में अब भारत अग्रिम पंक्ति में आकर खड़ा हो गया है। इस अभूतपूर्व संकट के केंद्र में उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र है, जहां के बांदा जिले ने तापमान के सारे पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। गत दिवस बांदा में पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसने वैश्विक स्तर पर खतरे की घंटी बजा दी है।


मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि अभी नौतपा की शुरुआत भी नहीं हुई है। आगामी 25 मई से नौतपा प्रारंभ होने जा रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से साल का सबसे गर्म समय माना जाता है। परंतु, नौतपा के दस्तक देने से पहले ही देश का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। बांदा में दर्ज किए गए इस रिकॉर्ड तापमान के बाद भारत अब दुनिया के सबसे गर्म देशों की सूची में सीधे तीसरे नंबर पर आ गया है। वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय बांदा से अधिक तापमान केवल मिस्र के असवान (49.4°C) और सऊदी अरब के अराफात (48.4°C) में ही दर्ज किया गया है। इस सूची में मध्य प्रदेश का खजुराहो भी 47.4°C तापमान के साथ दुनिया भर में चौथे स्थान पर काबिज है।

देश के 16 शहरों में 46 डिग्री से ऊपर पहुंचा पारा
उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक, आधा देश इस समय भट्टी की तरह तप रहा है। बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र के लगभग 16 प्रमुख शहरों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया। आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के वर्धा में पारा 47.1°C दर्ज किया गया, जबकि हरियाणा के रोहतक में यह 46.9°C रहा। इसी तरह महाराष्ट्र के नागपुर और मध्य प्रदेश के नौगांव में भी भीषण तपिश के कारण पारा 46.6°C तक जा पहुंचा। इन शहरों में दोपहर के समय सड़कें पूरी तरह सुनसान नजर आ रही हैं और जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है।
पाकिस्तान से आ रही ‘थार’ की सूखी और गर्म हवाएं
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस अप्रत्याशित गर्मी के पीछे के भौगोलिक कारणों का खुलासा किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत और थार मरुस्थल की ओर से आने वाली सूखी और अत्यधिक गर्म हवाएं बिना किसी अवरोध के सीधे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं। इन गर्म हवाओं (लू) के लगातार प्रवाह के कारण वायुमंडल में नमी पूरी तरह समाप्त हो गई है। यही वजह है कि जो भीषण गर्मी आमतौर पर मई के आखिरी हफ्ते या जून के शुरुआती दिनों में महसूस होती थी, उसने इस बार मई के मध्य में ही अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है।
आखिर बांदा में ही क्यों टूट रहे हैं गर्मी के रिकॉर्ड?
बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिनेश ने इस पर विस्तृत प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, बांदा में देश का सर्वाधिक तापमान दर्ज होने के पीछे कई भौगोलिक और मानवीय कारण जिम्मेदार हैं। सबसे प्रमुख कारण बांदा की भौगोलिक स्थिति का कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के बेहद नजदीक होना है। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें सीधे लंबवत पड़ती हैं और आसमान पूरी तरह साफ रहता है। बुंदेलखंड का यह इलाका पठारी है, जहां की मिट्टी में नमी की भारी कमी है। रही-सही कसर जंगलों की अंधाधुंध कटाई, लगातार हो रहे अवैध खनन और क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियों के सूखने ने पूरी कर दी है। इन सभी कारकों ने मिलकर बांदा को एक थर्मल पॉकेट में तब्दील कर दिया है।
मानसून की रफ्तार थमी, एक ही जगह अटका चक्र
एक तरफ जहां देश भीषण गर्मी से त्रस्त है, वहीं राहत की उम्मीद जगाने वाले मानसून की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून पिछले तीन दिनों से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और कोलंबो के आसपास एक ही स्थान पर अटका हुआ है। इसे आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वायुमंडलीय दबाव या गतिज ऊर्जा नहीं मिल पा रही है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि गुरुवार से पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम के मिजाज में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने देश के कुछ हिस्सों के लिए राहत की खबर भी जारी की है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में आगामी दिनों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने का ‘ऑरेंज’ और ‘रेड’ अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, लक्षद्वीप और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में 24 मई तक मानसून पूर्व की अच्छी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, इन राज्यों से इतर देश का शेष हिस्सा फिलहाल इसी तरह भीषण गर्मी और लू की चपेट में झुलसता रहेगा।
सेहत पर सीधा हमला: व्यवहार में आ रहा चिड़चिड़ापन और गुस्सा
अत्यधिक तापमान केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि यह इंसानी दिमाग और व्यवहार पर भी गहरा असर डाल रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब वायुमंडल का तापमान बढ़ता है, तो मानव शरीर को अपने आंतरिक तापमान को संतुलित (ठंडा) रखने के लिए सामान्य से कहीं अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इस अत्यधिक शारीरिक तनाव के कारण मस्तिष्क में ‘फील गुड’ हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है। परिणामस्वरुप, लोगों में बेवजह गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ने लगता है। इसके कारण एकाग्रता में कमी और अनिद्रा (कम नींद आने) जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से उभर रही हैं।
एम्स दिल्ली की स्वास्थ्य एडवायजरी: प्यास न लगे तो भी पिएं पानी
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने इस जानलेवा गर्मी से बचने के लिए एक विशेष स्वास्थ्य गाइडलाइन जारी की है। डॉ. निश्चल के अनुसार, इस मौसम में बुजुर्गों, नवजात बच्चों और पहले से ही गंभीर बीमारियों (जैसे हृदय रोग, डायबिटीज) से पीड़ित लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक, जब धूप का असर सबसे तीखा होता है, बिना किसी जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें।
डॉ. निश्चल ने विशेष रूप से सलाह दी है कि इस मौसम में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचने के लिए शरीर में पानी का स्तर बनाए रखना अनिवार्य है। भले ही आपको प्यास न लग रही हो या गला न सूख रहा हो, फिर भी नियमित अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। एक वयस्क व्यक्ति को दिनभर में कम से कम 4 लीटर पानी या तरल पदार्थों का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके अलावा, दोपहर के समय किसी भी प्रकार के शारीरिक मेहनत वाले कार्यों से बचें और शरीर को हवादार रखने के लिए केवल ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़ों का ही चयन करें।
आगामी दो दिनों के मौसम का पूर्वानुमान
22 मई का मौसम विश्लेषण
देश के अधिकांश हिस्सों के लिए यह दिन अत्यधिक कष्टकारी रहने वाला है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पंजाब में मौसम विभाग ने ‘हीटवेव’ यानी लू का गंभीर अलर्ट जारी किया है। इसके विपरीत, पूर्वी भारत के बिहार राज्य में मौसम करवट ले सकता है, जहां बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने की संभावना है, जिससे वहां के तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है।
23 मई की मौसमी स्थिति
इस दिन राजस्थान में स्थिति और अधिक विकट हो सकती है, जहां ‘गंभीर हीटवेव’ (Severe Heatwave) की चेतावनी दी गई है। यहां न केवल दिन तपेगा, बल्कि रातें भी अत्यधिक गर्म रहने वाली हैं, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के इलाकों में भी लू का प्रकोप बदस्तूर जारी रहेगा। दूसरी तरफ, देश के भौगोलिक छोरों पर मौसम का दूसरा रूप दिखेगा; असम, मेघालय, केरल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और तमिलनाडु में मानसून की सक्रियता के कारण भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।



