मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड के लिए हफ्तों की डेट
अस्पताल स्थानांतरण का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने अल्मोड़ा जिला चिकित्सालय को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की प्रदेश सरकार की नीति का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने कहा कि जिला अस्पताल को शिफ्ट करने का निर्णय न केवल अल्मोड़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर संकट खड़ा करेगा, बल्कि इससे नगर के व्यापार और स्थानीय रोजगार पर भी व्यापक असर पड़ेगा। यूकेडी ने सरकार से जिला चिकित्सालय के स्थानांतरण की नीति तत्काल वापस लेने की मांग की है। निर्णय वापस नहीं लिए जाने पर संगठन ने बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी है।
UKD के जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी ने प्रेस वार्ता में कहा कि वर्तमान में मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच के लिए भी मरीजों को कई-कई सप्ताह बाद की तारीख दी जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में ही मरीजों का दबाव और जांच सुविधाओं को लेकर दिक्कतें बनी हुई हैं, तो जिला चिकित्सालय को भी वहां स्थानांतरित कर देने से आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिल पाएंगी। उन्होंने आशंका जताई कि जिला अस्पताल को शिफ्ट करने से अल्मोड़ा की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, नगर की अर्थव्यवस्था का भी आधार : विनय किरौला
यूकेडी नेता विनय किरौला ने कहा कि जिला चिकित्सालय केवल स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से यह अल्मोड़ा नगर की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के कारण नगर के होटल, भोजनालय, मेडिकल स्टोर, टैक्सी, फल-सब्जी, कपड़ा, छोटे दुकानदारों सहित विभिन्न कारोबारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार बिना समुचित अध्ययन और स्थानीय परिस्थितियों को समझे जिला चिकित्सालय को अन्यत्र स्थानांतरित करती है तो इसका सीधा असर अल्मोड़ा के व्यापार पर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अस्पताल के स्थानांतरण से कारोबार चौपट होने की स्थिति पैदा हो सकती है और बड़ी संख्या में व्यापारी एवं स्वरोजगार से जुड़े लोग प्रभावित होंगे।
‘सरकारी संस्थानों की भूमिका रोजगार और स्वरोजगार पैदा करना भी’
विनय किरौला ने कहा कि जिला अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान का उद्देश्य केवल चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके आसपास प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय को शहर से हटाने का असर केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे नगर की पूरी आर्थिक गतिविधि प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है। ऐसे में जिला अस्पताल को तत्काल स्थानांतरित करने के बजाय पहले मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों, जांच व्यवस्थाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों को पर्याप्त रूप से मजबूत किया जाना चाहिए।
मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह स्थापित होने में लगेंगे 10 से 15 वर्ष : यूकेडी
यूकेडी नेताओं ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह स्थापित होने और अपेक्षित स्तर की सुविधाएं विकसित होने में अभी लंबा समय लग सकता है। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल कॉलेज को पूर्ण रूप से स्थापित होने में कम से कम 10 से 15 वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में जिला चिकित्सालय को स्थानांतरित करने का फैसला जल्दबाजी भरा कदम होगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय जनता की जरूरतों के साथ-साथ नगर के व्यापारिक एवं सामाजिक प्रभाव का भी समग्र अध्ययन किया जाए। इसके बाद ही भविष्य की कोई नीति बनाई जाए।
फैसला वापस नहीं लिया तो बड़े जनआंदोलन की चेतावनी
यूकेडी के केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल सरकार की जिला अस्पताल अल्मोड़ा को स्थानांतरित करने की नीति का पूर्ण विरोध करता है। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी स्थिति में इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जिला चिकित्सालय को स्थानांतरित करने का निर्णय वापस नहीं लिया तो उत्तराखंड क्रांति दल इसके विरोध में व्यापक और बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने सरकार से जनहित, स्वास्थ्य व्यवस्था और अल्मोड़ा के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रेस वार्ता में ये लोग रहे मौजूद
प्रेस वार्ता में यूकेडी जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी, केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी, केंद्रीय संयुक्त सचिव त्रिलोक लटवाल, यूकेडी नेता विनय किरौला, पूर्व कर्मचारी नेता प्रताप सिंह बिष्ट, सुजीत टम्टा, मोहित साह, अक्षय टम्टा तथा गणेश मुस्युनी मौजूद रहे।
यूकेडी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जिला चिकित्सालय को स्थानांतरित करने से पहले सरकार को अल्मोड़ा की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की जरूरत, मेडिकल कॉलेज की वर्तमान क्षमता और नगर के व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का गंभीरता से आकलन करना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर वह आगे भी अपना विरोध जारी रखेगा।





