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हल्द्वानी: पर्वतीय पत्रकार महासंघ के होली मिलन में बिखरे वृंदावन की होली के रंग

भक्ति और उल्लास में डूबे पत्रकार

सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। पर्वतीय पत्रकार महासंघ उत्तराखंड द्वारा आयोजित भव्य होली मिलन समारोह इस वर्ष विशेष उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। नगर के एक सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में वृंदावन की पारंपरिक होली की मनोहारी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भक्तिरस और आनंद से भर दिया। रंग, गुलाल, फूलों की होली और मधुर फाग गायन के बीच पूरा वातावरण उल्लासमय हो उठा, जिससे कार्यक्रम एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव में परिवर्तित हो गया।

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समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एवं राज्य आंदोलनकारी ललित जोशी तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष साकेत अग्रवाल रहे। अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्वतीय पत्रकार महासंघ द्वारा किए जा रहे रचनात्मक एवं सामाजिक प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल समाज में सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पत्रकारिता जगत और आमजन के बीच आत्मीय संवाद और समन्वय को भी सुदृढ़ करते हैं।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पाठक ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और सदस्यों का स्वागत करते हुए महासंघ की गतिविधियों, उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्वतीय पत्रकार महासंघ उत्तराखंड पत्रकारों के हितों की रक्षा के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

इस अवसर पर संगठन के संरक्षक डॉ. दिनेश जोशी, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. मदन मोहन पाठक, भावना पाठक, डॉ. पंकज उप्रेती, जिला सूचना अधिकारी गिरजा जोशी, वरिष्ठ पत्रकार संजय जोशी, अशोक गुलाटी, संजय पाठक, तारु तिवारी, आनंद बत्रा, दीपक मनराल, सुरेंद्र मौर्य सहित सैकड़ों पत्रकार, गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पारंपरिक फाग गायन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रंगों की बौछार के बीच सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। उल्लासपूर्ण माहौल में हास्य, संगीत और आत्मीय संवाद ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया।

समारोह का समापन आपसी सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ हुआ। आयोजन ने पत्रकारिता जगत में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हुए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।

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