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हल्द्वानी : रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला, शुरू हुआ डोर-टू-डोर सर्वे

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला

हल्द्वानी समाचार | बनभूलपुरा स्थित रेलवे की अतिक्रमण भूमि का आज शुक्रवार से डोर-टू-डोर सर्वे शुरू हो चुका है, डोर-टू-डोर सर्वे के लिए छह टीमों का गठन किया है। टीम दस्तावेजों को लेकर सर्वे कर रही है, इस दौरान रेलवे और स्थानीय पुलिस मौजूद है। रेलवे के सीमांकन वाले क्षेत्र को छह जोन में बांट दिया गया है। इन छह जोन में छह अलग-अलग टीमें सर्वे कार्य कर वहां रह रहे परिवारों और भवनों की जानकारी जुटाएंगी। इस दौरान एसडीएम परितोष वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेई, तहसीलदार सचिन कुमार समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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आज से डोर-टू-डोर सर्वे शुरू

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एसडीएम परितोष वर्मा ने बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में आज रेलवे द्वारा 30 हेक्टेयर अतिक्रमण वाली जगह पर सर्वे का काम किया जा रहा है। जो काफी दिनों तक चलेगा। रेलवे की टीम के साथ यह सर्वे किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सबमिट की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी उससे पहले यह सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा।

हल्द्वानी : रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला, शुरू हुआ डोर-टू-डोर सर्वे

 

नोडल अधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि प्रशासन की तरफ से रेलवे को सहयोग करने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम और तहसीलदार के नेतृत्व में 6 टीमों का गठन किया गया है। साथ ही शांति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। शुरुआती दौर में बताया जा रहा है कि अगले 15 दिन तक बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि में किए गए अतिक्रमण का सर्वे कार्य किया जाएगा। जिसमें भवन संरचनाएं, पानी, बिजली के कनेक्शन और सरकारी भवन सहित संबंधित क्षेत्र का चिन्हीकरण व गूगल कोऑर्डिनेट सहित विभिन्न माध्यम से संपूर्ण सर्वे का काम किया जा रहा है।

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे अपनी पटरी से काफी दूर सर्वे कर रहा है जबकि उसके पिलर पटरी से 50 मीटर की दूरी पर लगे हैं ऐसे में वह लोग इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन

बता दें कि बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पिछले दिनों कोर्ट ने सुनवाई के दौरान रेलवे से पूछा था कि उसे तात्कालिक जरूरतों के लिए कितनी जमीन की जरूरत है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अतिक्रमण वाली भूमि पर वर्षों से बसे लोगों के पुनर्वास संबंधी निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश पर रेलवे ने संबंधित भूमि का डिजिटल सर्वे कराने के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन से भवन और परिवारों की गणना में मदद की मांग की। रेलवे के अनुरोध पर अब स्थानीय प्रशासन आज से संबंधित भूमि पर बसे परिवारों और वहां मौजूद आवासीय भवनों और अन्य भवनों आदि की जानकारी जुटाएगा।

रेलवे भूमि अतिक्रमण मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन

छह जोन में बांटा गया क्षेत्र

सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेयी ने बताया कि संबंधित क्षेत्र को छह जोन में बांटा गया है। इन छह जोन के लिए रेलवे की ओर से छह टीमें बनाई गई हैं। हर टीम में राजस्व विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, जल संस्थान, बाल विकास विभाग और खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रतिनिधि रखे गए हैं। यह रेलवे के साथ सर्वे कर भवन और परिवारों की संख्या जुटाएंगे। डोर टू डोर सर्वे का कार्य शनिबाजार रोड से शुरू होकर इंदिरानगर छोटी रोड, बड़ी रोड और दुर्गा देवी मंदिर से इंदिरानगर ठोकर तक होगा। बताया कि संबंधित क्षेत्र में गुरुवार को निशान भी लगाए गए हैं। सर्वे के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और आरपीएफ के जवान भी मौके पर मौजूद रहेंगे।

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