Uttarakhand Breaking : Eco Tourism शुल्क बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव, यहां पड़ेगा असर

सीएनई रिपोर्टर, देहरादून निकट भविष्य में ईको टूरिज्म को लेकर शासन स्तर पर जल्द ही कोई नया फैसला लिया जा सकता है। गत 13 सालों…

सीएनई रिपोर्टर, देहरादून

निकट भविष्य में ईको टूरिज्म को लेकर शासन स्तर पर जल्द ही कोई नया फैसला लिया जा सकता है। गत 13 सालों से चले आ रहे ईको टूरिज्म के निर्धारित शुक्ल में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिसके बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि जंगल सफारी, ईको पार्क का भ्रमण से लेकर वन विभाग के तमाम विश्राम गृहों के निर्धारित शुल्क में पांच से दस प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

वन प्रमुख, पीसीसीएफ (हॉफ) का कहना है कि उत्तराखंड में कई सालों से ईको टूरिज्म के तहत निर्धारित शुक्ल में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कुछ गतिविधियों के दाम बढ़ाए जाने तो कुछ के कम किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। शुक्ल निर्धारण को लेकर शासन के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

विभागीय सूत्रों से मिली सूचना के अनुसार जहां आने वाले दिनों में फोरेस्ट गेस्ट हाउस में ठहरने व जंगल सफारी का शुल्क बढ़ाया जा सकता है, वहीं फिल्म, documentary production, पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों का शुक्ल घट भी सकता है। जिसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि जहां राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना है, वहीं सरकार की आय में वृद्धि भी जरूरी है।

ज्ञात रहे कि उत्तराखंड प्रदेश में 06 राष्ट्रीय उद्यान, 07 वन्य जीव विहार और 04 रिजर्व फोरेस्ट एरिया हैं। इसके अतिरिक्त वन क्षेत्रों में 14 eco tourism sector भी हैं। जहां साल भर पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। इनमें Wildlife Safari, Camping, Hiking, Bird Watching, Angling, Nature Walk, Butterfly Watching और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियां शामिल हैं। अच्छी ख़बर यह है कि सरकार को इन सभी गतिविधियों से काफी लाभ हो रहा है। फाइनेंशल एयर 2021-22 में प्रदेश सरकार को Eco tourism and eco based tourism से कुल 17.38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। सबसे ज्यादा कमाई कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से हुई है।

Chief Conservator of Forests Eco Tourism Dr. Parag Madhur Dhakate के अनुसार गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम, वाइल्ड लाइफ सफारी, एंग्लिंग, वाहनों की एंट्री, फोटोग्राफी, प्रतिव्यक्ति एंट्री शुक्ल आदि में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा कुछ ट्रैकिंग रूट, बर्ड वाचिंग, नेचर ट्रैल आदि पर प्रथम बार शुक्ल लगाया जा सकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2009 में आखिरी बार ईको टूरिज्म का शुल्क निर्धारित हुआ था। डॉ. पराग मधुर धकाते ने बताया कि Eco Tourism के तहत लिए जाने वाले शुक्ल का निर्धारण कर लिया गया है। फाइल शासन को भेजी गई है। उम्मीद है कि अगले माह तक नई दरें लागू कर दी जाएंगी।

प्रदेश में यह हैं ईको टूरिज्म के क्षेत्र —

⏩ धनोल्टी ईको पार्क (टिहरी)

⏩ सिमतोला ईको पार्क (अल्मोड़ा)

⏩ कौड़िया ईको पार्क (टिहरी)

⏩ लच्छीवाला नेचर पार्क (देहरादून)

⏩ नीर झरना (ऋषिकेश)

⏩ हिमालय बॉटेनिकल गार्डन (नैनीताल)

⏩ संजय वन (हल्द्वानी)

⏩ चौरासी कुटिया (राजाजी टाइगर रिजर्व)

⏩ जीबी पंत हाई एल्टीट्यूड जू (नैनीताल)

⏩ देहरादून जू-हर्बल गार्डन

⏩ ईको पार्क (मुनस्यारी)

⏩ कॉर्बेट न्यूजिम (कालाढूंगी)

⏩ कॉर्बेट फॉल (रामनगर)

⏩ बराती राव (रामनगर)