सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
जहां एक ओर वन बचाओ, पेड़ लगाओ के नारे समय—समय पर गुंजायमान होते रहते हैं और हरियाली लाने के कार्यक्रमों पर जोर है। इतना ही नहीं वन कानून प्रभावी हैं। इसके बावजूद जनपद के एक क्षेत्र में दर्जनों हरे पेड़ काटे जाने का मामला प्रकाश में आया, किंतु व्यवस्था का आलम ये है कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी मामले पर शिकायत के करीब डेढ़ माह बाद भी कोई कार्रवाई होती ग्रामीणों को प्रतीत नहीं हुई। इतना जरूर है कि शिकायत के बाद जांच के आदेश हुए थे।
दरअसल, मामला अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे तहसील अंतर्गत ग्रामसभा चचरोटी के तोक/ग्राम बिजोली के पंचायती जंगल का है। गांव के निवासी भरत बौड़ाई समेत कई ग्रामीणों की ओर से हुई शिकायत के अनुसार क्षेत्र के जंगल में दर्जनों की तादाद में गुपचुप तरीके से हरे पेड़ काट डाले गए। बताया गया है कि वन सरपंच ने अपने स्तर से 65 पेड़ों के काटे जाने का पता लगाया और संबंधित दोषियों से 65 हजार रुपये जुर्माना भी वसूला गया। पेड़ के कटने के बाद पूर्व में ग्रामीणों की ओर से सीएम पोर्टल समेत जिलाधिकारी व सांसद से शिकायत की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश भी दिए। मगर परिणाम क्या हुआ, इसकी भनक आज तक ग्रामीणों को नहीं मिल पाई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती नजर आई। इससे ग्रामीण मायूस हैं। उनका कहना है कि ऐसे में दोषियों के सीने चौड़े हो रहे हैं। गत 24 फरवरी 2021 को श्री बौड़ाई ने ग्रामीणों की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है। जिसमें कार्रवाई की सूचना ग्रामीणों को नहीं मिलने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की बात की जानकारी देते हुए ठोस कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इसकी ज्ञापन की प्रति शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, सांसद, वन मंत्री व चीफ कंजरवेटर को भी भेजी है।
ALMORA NEWS: दर्जनों पेड़ कटे, शिकायत हुई, जांच के आदेश दिए और हासिल सिफर, ग्रामीणों ने फिर की कार्रवाई की मांग
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