अल्मोड़ा। हरियाली एवं सुख—समृद्धि का प्रतीक हरेला पर्व उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोकपर्व है। खासकर कुमाऊं में खासे उत्साह से यह पर्व मनाया जाता है। कई घरों में हरेले के उपलक्ष्य में डिकारे बनाने की अनूठी परंपरा है। जहां एक ओर सुंदर हरेले की टोकरियां सजी रहती हैं। वहीं दूसरी ओर देवी—देवताओं की कलात्मक मूर्तियों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाकर हरेले पर्व के दिन उनकी विशेष पूजा—अर्चना की जाती है। इस पर्व पर लोग खासकर भगवान शिवशंकर, पार्वती, गणेश व ईष्ट देवता की पूजा करते हैं। इन्हीं देवी—देवताओं की सर्जी मूर्तियों के समूह को डिकारे कहा जाता है। ये कई घरों में हरेले के पर्व पर दिखते हैं। इनका एक शानदार व प्रेरणादायी उदाहरण अल्मोड़ा के पांडेखोला निवासी ज्योतिषाचार्य एवं शिक्षाविद् गोविंद बल्लभ पंत ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने हरेला पर्व के उपलक्ष्य में डिकारे तैयार किए हैं। जिसमें भगवान की कलात्मक मूर्तियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कुमाऊं के सभी पुराने लोग डिकारे से परिचित हैं, लेकिन नई पीढ़ी के लिए यह नई बात है।
परंपरा : घरों में हरेले पर सजने लगे डिकारे, कलात्मक मूर्तियों का निर्माण
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Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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