प्रसिद्ध थारू लोक गायिका रिंकू राणा के आकस्मिक निधन पर शोक की लहर

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प्रसिद्ध थारू लोक गायिका रिंकू राणा के आकस्मिक निधन पर शोक की लहर
प्रसिद्ध थारू लोक गायिका रिंकू राणा के आकस्मिक निधन पर शोक की लहर

अल्मोड़ा में विहान संस्था की श्रद्धांजलि सभा

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : उत्तराखंड की प्रसिद्ध थारू लोक गायिका रिंकू राणा के आकस्मिक निधन पर अल्मोड़ा में गहरा शोक व्यक्त किया गया। उनकी स्मृति में विहान सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान के कलाकारों ने सोमवार को टैरिस थिएटर, धारानौला (अल्मोड़ा) में एक भावपूर्ण शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके लोकसंगीत में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।


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शोक सभा की शुरुआत रिंकू राणा की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई। उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और उनके शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि रिंकू राणा ने अपनी मधुर आवाज और समर्पण के माध्यम से थारू लोकसंगीत को नई पहचान दिलाई और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को व्यापक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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रिंकू राणा उत्तराखंड की थारू जनजाति की प्रथम प्रमुख लोक गायिका के रूप में जानी जाती थीं। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से थारू समाज की परंपराओं, संस्कृति और लोकजीवन को स्वर दिया। उनका जन्म 15 दिसंबर 1988 को हुआ था। 5 मार्च 2026 को एक सड़क दुर्घटना में मात्र 38 वर्ष की अल्पायु में उनका आकस्मिक निधन हो गया, जिससे पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई। उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक हस्तियों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।

विहान सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान की अध्यक्ष ममता वाणी भट्ट ने कहा कि रिंकू राणा का इस तरह असमय चले जाना उत्तराखंड और विशेष रूप से थारू जनजाति के सांस्कृतिक जगत के लिए अत्यंत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि रिंकू राणा ने अपने गीतों और बुलंद आवाज से थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे हमेशा याद किया जाएगा।

संस्थान के सचिव एवं भारतीय जनता पार्टी अल्मोड़ा के नगर महामंत्री देवेन्द्र भट्ट ने कहा कि रिंकू राणा की गायकी ने थारू परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनकी मधुर आवाज और समर्पण ने लोकसंगीत को नई ऊर्जा दी और उनकी कमी सदैव महसूस की जाएगी।

विहान संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार दयानन्द कठैत ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि स्वर कोकिला रिंकू राणा के असामयिक निधन से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के कला जगत को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि रिंकू राणा केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और लोकपरंपराओं को संवारने वाली एक महत्वपूर्ण विभूति थीं। उनके अचानक चले जाने से कला जगत में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना अत्यंत कठिन होगा।

शोक सभा में उपस्थित कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दें।

इस अवसर पर मनोज चम्याल, पंकज कार्की, निशा मेहरा, प्रियंका बिष्ट, अंशिता गैकोटी, अंकित चंद्रा, सुमित कुमार, मानव, नीरज कुमार और सुमित बिष्ट सहित कई कलाकार एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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