‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ अभियान के तहत गांधी पार्क में गरजी कांग्रेस
अल्मोड़ा और कटारमल के सरकारी गेस्ट हाउसों को निजी हाथों में सौंपने की कथित तैयारी पर जताया कड़ा विरोध
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। उत्तराखंड की जमीन, सरकारी संपत्तियों और जनसंसाधनों को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सरकारी संपत्तियों को बेचने की कथित तैयारी के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए साफ कर दिया है कि जनता की धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने की किसी भी कोशिश का सड़क से सदन तक विरोध किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ अभियान के तहत शुक्रवार को अल्मोड़ा के गांधी पार्क में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।
धरने का नेतृत्व अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने किया। कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से अल्मोड़ा नगर स्थित लोक निर्माण विभाग के सरकारी गेस्ट हाउस तथा ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कटारमल स्थित गेस्ट हाउस को बेचने की कथित तैयारी पर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि आखिर सरकार को ऐसी कौन-सी आर्थिक या प्रशासनिक मजबूरी आ गई है कि वर्षों से जनहित में उपयोग हो रही सरकारी संपत्तियों को बेचने की नौबत आ रही है? यदि सरकार के पास इन संपत्तियों के बेहतर रखरखाव की योजना नहीं है तो क्या इसका समाधान इन्हें निजी हाथों में सौंप देना है?
सरकारी संपत्तियां किसी सरकार की निजी जागीर नहीं : मनोज तिवारी
धरने को संबोधित करते हुए विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि सरकारी संपत्तियां किसी सरकार या सत्ताधारी दल की निजी जागीर नहीं हैं, बल्कि ये जनता की धरोहर हैं। इनका निर्माण सरकारी धन और जनता के संसाधनों से हुआ है तथा इनका उद्देश्य जनसुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग को सुनिश्चित करना है। ऐसे में इन संपत्तियों को बेचने की कथित तैयारी बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि अल्मोड़ा के लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस और कटारमल स्थित गेस्ट हाउस को लेकर क्या प्रस्ताव है? क्या इन्हें बेचने का निर्णय लिया जा चुका है या फिर इन्हें निजी हाथों में सौंपने की कोई प्रक्रिया चल रही है? यदि ऐसा है तो इसके पीछे सरकार का तर्क क्या है?
विधायक ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखने, उनका रखरखाव करने और जनहित में उनका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने की है, न कि उन्हें बेचकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की। कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और जनता की संपत्तियों को बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
राज्य आंदोलन के मूल संकल्प से भटक रही सरकार : गोविन्द सिंह कुंजवाल
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण जल, जंगल, जमीन और यहां के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ था। राज्य आंदोलनकारियों ने एक ऐसे उत्तराखंड का सपना देखा था, जहां स्थानीय जनता के हित सर्वोपरि हों और प्रदेश के संसाधनों पर यहां के लोगों का अधिकार सुरक्षित रहे। लेकिन आज सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर जिस तरह की चर्चाएं और फैसलों की खबरें सामने आ रही हैं, वे राज्य निर्माण के मूल उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा शहर और कटारमल के गेस्ट हाउस केवल ईंट-पत्थर से बने भवन नहीं हैं, बल्कि इनका अपना ऐतिहासिक, प्रशासनिक और पर्यटन संबंधी महत्व है। इन संपत्तियों का संरक्षण और विकास किया जाना चाहिए, न कि इन्हें बेचने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। सरकार को यह बताना होगा कि आखिर इन संपत्तियों को बेचने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है और इससे जनता को क्या लाभ मिलने वाला है?
कुंजवाल ने कहा कि उत्तराखंड की जमीन और सरकारी संसाधनों की रक्षा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है।
कांग्रेस की दो टूक : प्रस्ताव वापस लो, जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करो
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार को अल्मोड़ा और कटारमल स्थित दोनों सरकारी गेस्ट हाउसों को बेचने संबंधी किसी भी प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। साथ ही सरकार इस पूरे मामले में अपनी स्थिति सार्वजनिक करे, ताकि जनता को वास्तविकता का पता चल सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए इन संपत्तियों को बेचने या निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाए तो कांग्रेस आंदोलन को और व्यापक रूप देगी। नेताओं ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों, सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने की, जबकि संचालन पीसीसी सदस्य पीतांबर पांडे ने किया।
इस दौरान महानगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, महिला जिलाध्यक्ष राधा बिष्ट, किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष दीवान राम, सेवादल अध्यक्ष परितोष जोशी, प्रदेश सचिव दीप डांगी, किरन आर्य, पूर्व पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, शोभा जोशी, विनोद वैष्णव, एनडी पांडे, आनंद बगड़वाल, बीके पांडे, संजय दुर्गापाल, मनोज बिष्ट, अमित बिष्ट, पूरन रौतेला, पार्षद मुकेश कुमार, दीपक कुमार, वैभव पांडे, विकास कुमार, अम्बी राम, हरीश राम, ब्लॉक अध्यक्ष आनंद बिष्ट, रमेश लटवाल, अरविंद रौतेला, अख्तर हुसैन, तारा चंद्र शाह, देवेंद्र बिष्ट, हेम कुमार, दिनेश पिलख्वाल, तारा तिवारी, जया जोशी, फेमिना खान, दानिश खान, चंद्र किरण, दीवान सिंह फर्त्याल, पूरन बिष्ट और नरेंद्र बनोला सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि उत्तराखंड की जमीन, सरकारी संपत्तियां और जनता के अधिकार किसी भी सरकार की मनमर्जी के हवाले नहीं किए जा सकते। जनता की धरोहरों की रक्षा की यह लड़ाई अब केवल अल्मोड़ा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा।









