BREAKING NEWS | उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले

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अग्निवीरों को 10% आरक्षण, हरिद्वार में नए मेडिकल कॉलेज की चर्चा…

धामी कैबिनेट के 13 फैसलों में क्या-क्या खास? पढ़िए पूरी लिस्ट

CNE REPORTER, हरिद्वार। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार स्थित मेला नियंत्रण भवन सभागार में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक सुधार, आधारभूत ढांचे, जनहितकारी योजनाओं और युवाओं से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। कैबिनेट के निर्णयों में सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए भर्ती संबंधी नई नियमावली, जन विश्वास संशोधन विधेयक, बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक और विधानसभा के आगामी सत्र से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख रहे। इसके अतिरिक्त सरकारी पदों की निरंतरता, किफायती आवास परियोजना, भू-उपयोग परिवर्तन में त्रुटि सुधार, बाल वीरता पुरस्कार योजना तथा हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान के विकास को भी मंजूरी दी गई।


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आखिर वे कौन से 13 फैसले हैं, जिनका असर उत्तराखंड के युवाओं, आम नागरिकों और सरकारी व्यवस्था पर पड़ सकता है? जानिए एक-एक निर्णय का पूरा विवरण।

1. अग्निवीरों को 10% क्षैतिज आरक्षण, भर्ती प्रक्रिया में भी राहत

उत्तराखंड की राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती वाले वर्दीधारी पदों पर सेवामुक्त अग्निवीरों के सेवायोजन के लिए क्षैतिज आरक्षण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई।

वर्ष 2025 की नियमावली में सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, अधिकतम आयु सीमा तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा में छूट का प्रावधान किया गया था। केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार नई नियमावली में लिखित परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा में छूट का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

इस निर्णय का उद्देश्य राज्य के पात्र पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आगे बढ़ाना है।

2. छोटे अपराधों पर राहत की तैयारी, विधानसभा में आएगा जन विश्वास विधेयक

प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने और कारोबार के अनुकूल माहौल तैयार करने के उद्देश्य से द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई।

प्रस्तावित विधेयक के अंतर्गत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, मामूली तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर नागरिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान करने तथा पुराने और अनावश्यक कानूनी प्रावधानों को हटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

इसका उद्देश्य अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है। हालांकि, संबंधित बदलाव विधेयक की विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होंगे।

3. बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निर्माण और भूमि उपयोग पर लागू होंगे नियम

उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। इसके माध्यम से उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया, मानक और कार्यप्रणाली निर्धारित की जाएगी।

नियमावली का उद्देश्य बाढ़ संभावित क्षेत्रों में भूमि के उपयोग एवं विकास गतिविधियों को नियंत्रित करना और बाढ़ के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है। इससे जन-धन, संपत्ति और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बाढ़ से होने वाली संभावित क्षति का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।

4. विधानसभा का अगला सत्र कब और कहां होगा? CM धामी लेंगे फैसला

उत्तराखंड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी दी गई। सत्र की तिथि और स्थान निर्धारित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया गया है।

अब विधानसभा सत्र के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने का निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।

5. अग्निशमन सेवाओं के लिए नया कानून, पुराने अधिनियम में होगा बदलाव

उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई। प्रस्तावित विधेयक भारत सरकार के मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप तैयार किया गया है।

बढ़ते नगरीकरण, औद्योगिक विकास, आपदाओं और संभावित अग्नि दुर्घटनाओं की चुनौतियों को देखते हुए वर्तमान अग्निशमन संबंधी अधिनियम को पुनरीक्षित कर नया कानून लाने की तैयारी है।

इसका उद्देश्य प्रदेश में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। विधेयक को कानून का रूप मिलने के बाद इसके प्रावधानों के अनुसार व्यवस्था में बदलाव होगा।

6. स्वजल और जल-स्वच्छता मिशन के 215 पद एक साल तक रहेंगे जारी

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वजल परियोजना प्रबंधन इकाई और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के कुल 215 पदों की निरंतरता को मंजूरी दी गई।

इनमें स्वजल के 189 और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 26 पद शामिल हैं। इन पदों को 1 मार्च 2026 से 28 फरवरी 2027 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। संबंधित कार्मिकों को पूर्व की भांति वेतन और मानदेय का भुगतान राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के माध्यम से किया जाएगा।

7. हरिद्वार में किफायती आवास परियोजना को रास्ते की चौड़ाई में छूट

हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के ग्राम सिसौना में प्रस्तावित किफायती आवासीय परियोजना के लिए पहुंच मार्ग की न्यूनतम निर्धारित चौड़ाई में शिथिलता को मंजूरी दी गई।

करीब 8.1169 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना के तलपट मानचित्र की स्वीकृति के लिए नौ मीटर चौड़ा पहुंच मार्ग जरूरी था। उपलब्ध मार्ग छह मीटर चौड़ा होने के कारण तीन मीटर की शिथिलता प्रदान की गई।

यह परियोजना प्रधानमंत्री आवास योजना तथा केंद्र और राज्य सरकार की आवास नीति के अनुरूप प्रस्तावित है।

8. ऊधमसिंह नगर में भू-उपयोग परिवर्तन के आदेश की गलती सुधरेगी

ऊधमसिंह नगर जिले की बाजपुर तहसील के ग्राम भौना इस्लामनगर में 24,280 वर्गमीटर भूमि के औद्योगिक से आवासीय भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी शासनादेश में खसरा संख्या की त्रुटि सुधारने को मंजूरी दी गई।

10 नवंबर 2023 के शासनादेश में त्रुटिवश दर्ज खसरा संख्या 321/1अ के स्थान पर सही संख्या 321/2अ अंकित की जाएगी। यह निर्णय अभिलेखों में दर्ज गलती को दुरुस्त करने से संबंधित है।

9. साहसी बच्चों को मिलेगा मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार

प्रदेश के बहादुर और साहसी बच्चों को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना को मंजूरी दी गई।

इस योजना के तहत विपरीत परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक कार्य करने, असाधारण साहस, पराक्रम, मानवीय संवेदना और वीरता का परिचय देने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाएगा।

योजना का उद्देश्य बच्चों के साहस को पहचान देना, उन्हें प्रोत्साहित करना और दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनाना है।

10. हरिद्वार में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का होगा विस्तार

हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार के लिए सोसायटी गठन को सैद्धांतिक अनुमोदन दिया गया।

प्रस्तावित योजना के अंतर्गत संस्थान को योग एवं ध्यान केंद्र, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, ज्योतिष एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र, ललित कला केंद्र, हिंदू अध्ययन एवं दर्शन केंद्र तथा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध को बढ़ावा देना है।

11. सरकारी संपत्तियों से मिलने वाली आय का 92% संबंधित एजेंसियों को

उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना अधिनियम, 2023 की अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत सरकारी एजेंसियों, स्थानीय निकायों और संबंधित संस्थाओं की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित एजेंसियों को दिए जाने का प्रावधान है।

इस निर्णय का संबंध सरकारी परिसंपत्तियों से प्राप्त आय के वितरण की व्यवस्था से है।

12. संस्कृति विभाग के वित्तीय अधिकारों में होगा बदलाव

वित्तीय नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके अंतर्गत संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग के स्थान पर महानिदेशक, संस्कृति निदेशालय का उल्लेख किया जाएगा।

इस बदलाव से विभाग की प्रशासनिक संरचना और वित्तीय कार्यों में जिम्मेदारी को निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप स्पष्ट किया जाएगा।

13. प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार का आभार, राज्य के लिए सहयोग जारी रखने की अपेक्षा

उत्तराखंड के विकास में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही राज्य की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों, सीमावर्ती क्षेत्रों और सामरिक महत्व को देखते हुए भविष्य में भी केंद्र सरकार से सहयोग जारी रखने की अपेक्षा जताई गई।

कैबिनेट बैठक से पहले हरकी पैड़ी पर पूजा-अर्चना

कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ हरकी पैड़ी पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान शंखनाद किया गया, गंगा आरती में भाग लिया गया और गंगा में दूध अर्पित किया गया।

सरकार के अनुसार, यह पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के कार्यकाल के संदर्भ में आयोजित किया गया। शंखनाद को विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा गया, लेकिन इसे लेकर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय घटनाक्रम को तथ्यात्मक रूप से देखना उचित होगा।

क्या हैं इन फैसलों के मायने?

कैबिनेट के निर्णयों में युवाओं के लिए भर्ती संबंधी प्रावधानों, कारोबार को सरल बनाने, बाढ़ के जोखिम को कम करने, अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिखाई देता है। वहीं, किफायती आवास, बाल वीरता पुरस्कार और प्राच्य शोध संस्थान जैसे प्रस्ताव जनहित, संस्कृति और सामाजिक प्रोत्साहन से जुड़े हैं।

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