गोपा धपोला ने बताया अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर जनपद में जिला पंचायत के गठन को आठ माह का लंबा समय बीत जाने के बावजूद अब तक जिला नियोजन समिति (DPC) का गठन न होना अब एक गंभीर विवाद का रूप लेता जा रहा है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में शासन और प्रशासन की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।


अधिकारों के हनन का आरोप
जिला पंचायत सदस्य (जेठाई) गोपा धपोला ने इस विलंब पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित सदस्यों की भूमिका को दरकिनार करना न केवल अनुचित है, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी है।
धपोला ने अपने जारी बयान में प्रमुख बिंदु उठाए:
- अलोकतांत्रिक प्रक्रिया: बिना निर्वाचित सदस्यों के जिला योजना की बैठकें आयोजित करना पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।
- अधिकारों का हनन: यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है और विकास कार्यों में उनके हस्तक्षेप को रोकने की एक साजिश प्रतीत होती है।
- उपेक्षा का भाव: शासन द्वारा जिला नियोजन समिति के गठन में की जा रही देरी से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की प्राथमिकताएं प्रभावित हो रही हैं।
“पंचायती राज व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को जो संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं, उनकी अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से बैठकें करना लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है।”
— गोपा धपोला, जिला पंचायत सदस्य
आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि जिला नियोजन समिति ही वह मंच है जहाँ जनपद के सर्वांगीण विकास की रूपरेखा तैयार होती है। इसके अभाव में सरकारी तंत्र अपनी मर्जी से योजनाओं का चयन कर रहा है, जो जनता की वास्तविक जरूरतों से मेल नहीं खातीं।
प्रभारी मंत्री का होगा विरोध गोपा धपोला ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में निर्वाचित सदस्यों की भागीदारी के बिना जिला योजना की बैठकें आयोजित की गईं, तो वह चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारों की रक्षा के लिए वह प्रभारी मंत्री के जनपद आगमन पर उनका पुरजोर विरोध करने के लिए बाध्य होंगे।
क्या है मुख्य मांग?
| क्रम संख्या | मांग का विवरण |
| 1 | जिला नियोजन समिति का अविलंब गठन किया जाए। |
| 2 | जिला योजना की बैठकों में निर्वाचित सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित हो। |
| 3 | विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाए। |
अब देखना यह होगा कि जनप्रतिनिधियों के इस कड़े रुख के बाद प्रशासन और शासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है।


