वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
नैनीताल। ओखलकांडा ब्लॉक के हरीशताल क्षेत्र में आबादी के नजदीक करीब 15 फीट लंबा विशालकाय अजगर एक डॉग को निगलते हुए मिला। अजगर डॉग के शरीर का आधे से अधिक हिस्सा निगल चुका था। भारी शिकार के कारण उसका पेट असामान्य रूप से फूल गया था और वह सामान्य गति से हिल-डुल भी नहीं पा रहा था।
विशाल अजगर को इस हालत में देखकर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाया।

डॉग को निगलने के बाद भारी हो गया था अजगर का शरीर
बताया गया कि करीब 15 फीट लंबे और 55 किलो से अधिक वजन वाले अजगर ने डॉग को अपना शिकार बनाया था। जब ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी, तब तक अजगर डॉग के शरीर का बड़ा हिस्सा निगल चुका था।
डॉग का काफी हिस्सा अजगर के शरीर के भीतर पहुंच जाने से उसके पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ गया था। भारी शिकार के कारण अजगर की गतिविधियां भी काफी सीमित हो गई थीं। वह तेजी से सरकने या सामान्य रूप से भागने की स्थिति में नहीं था।
विशालकाय अजगर को आबादी के करीब देखकर ग्रामीणों में उत्सुकता के साथ-साथ चिंता भी पैदा हो गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और लोग दूर खड़े होकर इस पूरे घटनाक्रम को देखने लगे।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम
ग्रामीणों ने मामले की जानकारी वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन क्षेत्र अधिकारी नितिन पंत के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू टीम हरीशताल क्षेत्र में पहुंची।
मौके पर पहुंचने के बाद वनकर्मियों ने सबसे पहले लोगों को अजगर से सुरक्षित दूरी पर किया। इसके बाद प्रशिक्षित कर्मचारियों ने स्थिति का आकलन करते हुए अजगर को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की।
रेस्क्यू के दौरान टीम ने बेहद सावधानी बरती, क्योंकि इतना बड़ा अजगर भारी शिकार निगलने के बाद भी अचानक प्रतिक्रिया कर सकता था।
अजगर के मुंह और पेट में फंसा था डॉग
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन विभाग की टीम ने अजगर के मुंह और पेट में फंसे डॉग को बाहर निकाला। हालांकि तब तक डॉग की मौत हो चुकी थी।
शिकार को बाहर निकालने के बाद अजगर की स्थिति पर वनकर्मियों ने नजर रखी। पूरे ऑपरेशन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि अजगर को किसी तरह की चोट न पहुंचे।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों के लिए यह दृश्य काफी हैरान करने वाला था। विशालकाय अजगर का आकार और डॉग को निगलने के बाद उसका फूला हुआ पेट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
आबादी से दूर जंगल में छोड़ा गया अजगर
वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अजगर को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया। इसके बाद उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर गहरे जंगल में उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।
अजगर के सुरक्षित जंगल में पहुंचाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग की कार्रवाई के चलते न केवल ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाया गया, बल्कि विशालकाय अजगर को भी बिना नुकसान पहुंचाए उसके प्राकृतिक आवास में वापस पहुंचा दिया गया।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है वन्यजीवों की आवाजाही का खतरा
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान जंगलों में बारिश और मौसम में बदलाव के चलते वन्यजीवों की आवाजाही कई बार आबादी वाले इलाकों के आसपास बढ़ जाती है। जंगल से सटे गांवों में सांप और अन्य वन्यजीव दिखाई देने की घटनाएं भी इस दौरान सामने आती रहती हैं।
ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी स्थान पर अजगर, सांप या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो उसके नजदीक जाने, उसे घेरने अथवा स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें।
वन विभाग को तत्काल दें सूचना
विभाग ने लोगों से कहा है कि वन्यजीव दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम ही ऐसे वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ सकती है।
हरीशताल में हुए इस रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि मानसून के दौरान जंगल और आबादी के बीच के क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतें और वन्यजीवों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचें।


