संचालक ने की थी पत्रकारों से अभद्रता
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा | गत दिनों मीडिया कर्मियों के साथ घोर अभद्रता करने वाले नगर के नर्सिंग संस्थान पर अब चौरफा आरोप लगाने लगे हैं। संस्थान का चिट्ठा अब एक—एक कर खुलने की उम्मीद है। सोमवार को उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (उक्रांद) की अल्मोड़ा जिला इकाई ने नगर के ‘माँ अम्बे इन्स्टीट्यूट’ में चल रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को उक्रांद के जिला अध्यक्ष दिनेश जोशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को एक औपचारिक पत्र सौंपकर संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।


जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में दल ने मां अम्बे इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज पर जो आरोप लगाए हैं, वो छात्रों के भविष्य और कानूनी नियमों के उल्लंघन से संबंधित हैं। सबसे पहले मान्यता पर सवाल उठाया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संस्थान वर्षों से नर्सिंग कोर्स करा रहा है, जिसमें अधिकांश छात्र उत्तराखण्ड के पहाड़ी मूल के गरीब परिवारों से हैं। उक्रांद ने मांग की है कि जिला प्रशासन स्पष्ट करे कि क्या इस संस्थान के पास नर्सिंग कोर्स संचालित करने की वैध मान्यता है या नहीं।
अवैध ‘स्कूलिंग’ के संचालन का भी आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि संस्थान ने बिना अनुमति के स्कूलिंग का कार्य भी शुरू कर दिया है। दल ने प्रशासन से पूछा है कि संस्थान के पास प्राथमिक, जूनियर या हाईस्कूल स्तर की मान्यता के प्रमाणपत्र हैं या नहीं, और इन्हें सार्वजनिक करने की मांग की है।
RTE नियमों का उल्लंघन का भी आरोप है। उक्रांद ने एक गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम’ (RTE) के तहत प्रवेश पाने वाले 25% छात्रों से भी संस्थान द्वारा पूरी फीस वसूली जा रही है, जो कि कानूनन गलत है।
ज्ञात रहे कि यह संस्थान गत दिनों मीडिया कर्मियों के साथ हुई अभद्रता के चलते चर्चा में आया था। उक्रांद ने संस्थान प्रबंधन पर छात्रों और मीडिया कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है और उचित कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। उक्रांद ने स्पष्ट किया है कि यदि इन बिंदुओं पर शीघ्र जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो दल उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
दिनेश जोशी, जिला अध्यक्ष, उक्रांद (अल्मोड़ा) का कहना है कि संस्थान पहाड़ के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई इन संस्थानों में लगा रहे हैं, ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह संस्थानों की वैधता की जांच करे। ज्ञापन सौंपने वालों में केंद्रीय सचिव त्रिलोक लटवाल, केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी, जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है।


