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Almora News: धूमधाम से मना विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का स्थापना दिवस

— तिलहनी—दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़े: डा. सिंह
— नई प्रजातियों का लोकार्पण, कई लोग सम्मानित
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
भले ही देश में खाद्य फसलों की उत्पादकता में आत्मनिर्भरता आई है, लेकिन तिलहनी एवं दलहनी फसलों के उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. अशोक कुमार सिंह ने कही। डा. सिंह यहां विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के 99वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। संस्थान का स्थापना दिवस रविवार को धूमधाम से मनाया गया। जिसमें फसलों की दो नई प्रजातियों का लोकार्पण किया गया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया।

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विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का 99वां स्थापना दिवस रविवार को संस्थान के अल्मोड़ा स्थित सभागार में काफी धूमधाम से मनाया गया। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. अशोक कुमार सिंह ने संस्थान के कुंदन हाउस स्थित पूजागृह में पूजा—अर्चना की और स्वामी विवेकानन्द की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात् कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गीत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि डा. अशोक कुमार सिंह ने द्वितीय पद्मभूषण प्रो. बोसी सेन स्मारक व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रो. बोसी सेन के योगदान पर बल देते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि वर्तमान में हमारा देश आत्मनिर्भर बनने में सक्षम हुआ है और खाद्य फसलों के उत्पादन में आत्म निर्भरता आई है। देश खाद्य फसलों का निर्यात करने में सक्षम हुआ है, परन्तु वर्तमान में तिलहनी एवं दलहनी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाने की अत्यन्त आवश्यकता बताई। उन्होंने विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए विभिन्न देशों से आयात कम करने पर जोर दिया। उन्होंने त्वरित प्रजनन एवं जीनोम संपादन पर विस्तृत जानकारी दी गई। डा. सिंह ने कहा कि आज तक देश में 87 जैव सुदृढ़ीकृत किस्मों का विमोचन हो चुका है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में ड्रोन के प्रयोग की संभावना पर कार्य करने की जरूरत बताई।

रामकृष्ण कुटीर अल्मोड़ा के अध्यक्ष स्वामी ध्रुवेशानन्द ने प्रो. बोसी सेन का स्मरण करते हुए प्राचीन काल में कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश के कृषि वैज्ञानिकों के शोध के फलस्वरूप आज सभी देशवासियों को अन्न उपलब्ध कराने में सफलता मिली है। विशिष्ट अतिथि नगरपालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि संस्थान निरन्तर उन्नति कर रहा है। जिसका श्रेय संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के परिश्रम एवं लगन को जाता है। उन्होंने कहा कि उनके ही परिश्रम की बदौलत कृषि के क्षेत्रों में एक आशातीत परिवर्तन आया है। श्री जोशी ने आज पहाड़ के किसानों के समक्ष बन्दरों एवं सूअरों की समस्या की ओर संस्थान का ध्यान खींचा। विशिष्ट अतिथि एमसी जोशी ने प्रो. बोसी सेन के व्यक्तित्व को याद करते हुए पर्वतीय कृषि में विविधता लाने की बात कही। संस्थान के पूर्व निदेशक डाॅ. जेसी भट्ट ने प्रो. बोसी सेन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने भी विचार रखे।

संस्थान के निदेशक डा. लक्ष्मीकान्त ने संस्थान के संस्थापक प्रो. बोसी सेन को नमन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा विगत वर्ष में संस्थान की उपलब्धियां रखी। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष के दौरान विभिन्न फसलों की 09 किस्में अधिसूचित तथा 03 किस्मों की पहचान की गयी। उन्होंने संस्थान द्वारा चलायी जा रही विभिन्न परियोजनाओं जैसे एससीएसपी, एनईएच एवं टीएसपी के माध्यम से कृषकों के लाभान्वित होने की जानकारी भी दी। इस मौके पर अतिथियों ने संस्थान के एक तकनीकी बुलेटिन, 02 प्रसार प्रपत्रों का विमोचन किया तथा संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों वीएल क्यूपीएम संकर 45, एवं वीएल धान 69 का लोकार्पण किया।
इन्हें किया गया सम्मानित

स्थापना दिवस समारोह में संस्थान के सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी डाॅ. जीएस बिष्ट, लैब टैक्नीशियन वरूण सुप्याल, तकनीकी सहायक केशव नौटियाल, तकनीशियन देवेन्द्र सिंह कार्की तथा कुशल सहायक मन्तराज को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए निदेशक प्रशस्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही इस वर्ष एवं आगामी वर्ष में सेवानिवृत्त हो रहे कार्मिकों कैलाश सिंह, प्रमोद कुमार चौधरी व रमेश सिंह कनवाल को संस्थान सम्मान प्रदत्त किया गया। प्रगतिशील कृषकों जगमोहन सिंह राणा, कुन्दन सिंह बिष्ट, विजय कुमार, चन्द्रशेखर जोशी एवं हरीश सिंह को भी सम्मानित किया गया। संस्थान के कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डा. कुषाग्रा जोशी ने किया जबकि प्रभागाध्यक्ष, फसल उत्पादन विभाग डाॅ. जेके बिष्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में परंपरानुसार आम की दावत के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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