श्रीमद् देवी भागवत कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
सीएनई रिपोर्टर, पनुवानौला। धौलादेवी विकासखंड के खोला भगवती मंदिर (माई थान) में चल रही श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा में इन दिनों आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। कथा के दौरान व्यास संजय गुरुरानी ने मानव जीवन की दुर्लभता का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को यह अमूल्य जीवन केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि हरि का गुणगान, सत्संग और भगवत भजन कर अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ, इसे व्यर्थ न गंवाएं
कथा व्यास संजय गुरुरानी ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। अनेक योनियों के बाद मनुष्य जन्म प्राप्त होता है और यही वह अवसर है, जब व्यक्ति भक्ति, ज्ञान एवं सद्कर्मों के माध्यम से अपने जीवन को धन्य बना सकता है। उन्होंने कहा कि भगवत भजन में ही मनुष्य के वास्तविक कल्याण का मार्ग निहित है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय सत्संग, ध्यान, धार्मिक कथा और प्रभु स्मरण के लिए अवश्य निकालें। इससे मन को शांति मिलने के साथ ही व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है।
काम, क्रोध, मद और लोभ से बचना जरूरी
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन प्राप्त करने के बाद यदि व्यक्ति सत्संग, ध्यान और धार्मिक कथाओं से विमुख हो जाता है, तो धीरे-धीरे वह काम, क्रोध, मद और लोभ जैसी प्रवृत्तियों की गिरफ्त में आने लगता है। यही प्रवृत्तियां आगे चलकर व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के व्यसनों की ओर ले जाती हैं।
उन्होंने कहा कि व्यसन केवल व्यक्ति के शरीर और मन को ही प्रभावित नहीं करते, बल्कि इसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। ऐसे में श्रीमद् भागवत कथा और सत्संग व्यक्ति को आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करते हैं।
सत्संग से दूर होती हैं नकारात्मक प्रवृत्तियां
संजय गुरुरानी ने कहा कि मनुष्य को नियमित रूप से धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों से जुड़ना चाहिए। कथा श्रवण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झांकने और अपनी गलत आदतों को पहचानने का प्रयास करता है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति व्यसनों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर होकर सद्मार्ग अपनाता है, तो इससे उसका स्वयं का जीवन ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज भी सुखी एवं संस्कारित बनता है।
प्रेम से जागृत होती है भक्ति, ज्ञान और वैराग्य
कथा व्यास ने भगवान की प्राप्ति के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान को पाने का सबसे सरल और सहज माध्यम स्नेह एवं प्रेम है। जब मनुष्य के हृदय में ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम उत्पन्न होता है, तो उसी प्रेम से भक्ति का जन्म होता है और भक्ति के माध्यम से ज्ञान एवं वैराग्य की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति दिखावे का विषय नहीं, बल्कि हृदय की अनुभूति है। निष्कपट प्रेम और श्रद्धा के साथ किया गया भगवान का स्मरण व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है तथा जीवन में शांति और संतोष का भाव पैदा करता है।
दूर-दराज के गांवों से पहुंच रहे श्रद्धालु
खोला भगवती मंदिर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा को लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा श्रवण के लिए खसपड़, आरतोला, पनुवानौला, तोली, बानठौक, गिरचोला, सेला, मैचून, बाड़ेछीना, कुंजा खाली, गुरड़ाबांज, चामी सहित अनेक गांवों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कथा स्थल पर पहुंच रहे श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में कथा का श्रवण कर रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने के साथ ही नई पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
भक्ति के साथ सामाजिक जागरूकता का भी संदेश
श्रीमद् देवी भागवत कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हो रहा है, वहीं कथा व्यास द्वारा समाज में व्याप्त नशे और अन्य व्यसनों से दूर रहने का संदेश भी दिया जा रहा है। धार्मिक कथा के माध्यम से दिए जा रहे इन संदेशों को ग्रामीण जनजीवन से जोड़कर देखा जा रहा है।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे प्रेम, सद्भाव, संयम और भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाएं तथा स्वयं भी सद्मार्ग पर चलें और दूसरों को भी प्रेरित करें। यही व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज के व्यापक कल्याण का मार्ग है।


