शिक्षिका जया पाण्डेय और युवक भाष्कर ने किया साहसिक रेस्क्यू
- ✒️ जगदीश कलौनी की रिपोर्ट
पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के बलुवाकोट क्षेत्र के लेक गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब जंगल से निकलकर एक विशाल मॉनिटर लिजर्ड (गोह) गांव में पहुंच गया। हालात तब और गंभीर हो गए, जब इस वन्यजीव का सिर एक डिब्बे में बुरी तरह फंस गया। सिर फंसने के कारण गोह काफी देर तक छटपटाता रहा और उसकी जान पर बन आई।
मौके पर मौजूद लोगों के बीच असमंजस की स्थिति थी, क्योंकि घायल और बुरी तरह छटपटा रहा यह वन्यजीव (Monitor lizard) बेहद ताकतवर था। इसी दौरान गांव के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका और जानी-मानी कुशल पर्वतारोही जावंती पाण्डेय (जया) ने साहस दिखाते हुए स्थानीय युवक भाष्कर के साथ मिलकर गोह को बचाने का निर्णय लिया।


जान हथेली पर रखकर किया रेस्क्यू
गोह के सिर में डिब्बा इस तरह फंस गया था कि उसे निकालना आसान नहीं था। जया पाण्डेय और भाष्कर ने पूरी सावधानी बरतते हुए वन्यजीव को नियंत्रित किया और धीरे-धीरे उसके सिर में फंसे डिब्बे को अलग किया।
काफी मशक्कत के बाद आखिरकार गोह का सिर डिब्बे से बाहर निकल आया। आजाद होते ही वन्यजीव को राहत मिली और उसकी जान बच गई।
स्थानीय लोग गोह को ‘ग्वाण’ के नाम से भी जानते हैं और इसे खतरनाक वन्यजीव मानते हैं। ऐसे में उसके बेहद करीब जाकर रेस्क्यू करना अपने आप में जोखिम भरा कदम था। बावजूद इसके जया पाण्डेय ने बिना घबराए वन्यजीव की जिंदगी बचाने का फैसला किया।
शिक्षिका के साथ साहसिक खेलों की भी पहचान
जावंती पाण्डेय पिछले तीन दशक से अधिक समय से अध्यापन के साथ-साथ साहसिक खेलों को बढ़ावा देने में सक्रिय हैं। वह पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों के क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
कोविड महामारी के पहले चरण के दौरान 6 दिसंबर 2020 को जया पाण्डेय ने 148 मीटर ऊंचे बिरथी जलप्रपात से उतरकर साहसिक उपलब्धि हासिल की थी। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।
सैकड़ों युवाओं को दे चुकी हैं साहसिक खेलों का प्रशिक्षण
जावंती पाण्डेय ‘इंट्रिसिक क्लाइंबर्स एंड एक्सप्लोरर्स’ (ICE) की संस्थापक भी हैं। संस्था के माध्यम से वह अब तक सैकड़ों युवक-युवतियों को साहसिक खेलों और पर्वतारोहण से जुड़ी गतिविधियों का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
उनका मानना है कि साहसिक गतिविधियां केवल रोमांच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, संकट से निपटने की क्षमता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित होती है।
वन्यजीव के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल बना रेस्क्यू
बलुवाकोट के लेक गांव में हुई यह घटना केवल एक वन्यजीव के रेस्क्यू की कहानी नहीं है, बल्कि मानवता, साहस और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल भी बन गई है।
एक ओर जहां फंसे हुए गोह को देखकर लोग भयभीत थे, वहीं जया पाण्डेय और भाष्कर ने जोखिम उठाकर उसकी जान बचाने का प्रयास किया। उनके इस साहसिक कदम की स्थानीय लोगों के बीच सराहना हो रही है।
गांव में पहुंचे इस वन्यजीव को सुरक्षित रूप से मुक्त कराना यह संदेश भी देता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थितियों में संवेदनशीलता, सतर्कता और सुरक्षित रेस्क्यू बेहद महत्वपूर्ण है।


