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सितारगंज ब्रेकिंग : माफियागिरी हावी, कैलाश नदी का वजूद खतरे में चार-चार विभाग मिलकर नहीं लगा पा रहे अवैध खनन पर रोक

नारायण सिंह रावत

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सितारगंज (उधमसिंहनगर)। किसी समय एक दम स्वच्छ निर्मल दिखाई देने और कल-कल बहने वाली कैलाश नदी की धीरे-धीरे कर खनन माफियाओं ने हालत बिगाड दी। नदी अब अस्तित्व के लिए जूझते हुए अपनी हालत पर तरस खाने को तरस रही है। खनन माफियाओं ने नदी के असल रूप को नष्ट कर वर्तमान स्वरूप को बेहद भयावह बना दिया है। नदीं में आज जिधर भी नजर उठाओं गहरे-गहरे गडढों और ऊबड़खाबड़ किनारों के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आता।

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उत्तर प्रदेश से पृथक होकर उत्तराखण्ड के अस्तित्व में आने के बाद 2004-05 में खनन की स्वीकृति लेकर खनन कारोबारियों ने कैलाश नदी में उपखनिज चुगान का खेल शुरू किया। फिर माफिया साल दर साल नदी का सीना चीरते गए और दोहन दिन-दोगुना रात चैगुना बढ़ता गया। वर्तमान समय में भी कैलाश नदी के उद्गम स्थल पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में चोर दरवाजे से खनन कार्य खूब हो रहा है। हालत यह है कि नकुलिया, कश्मीरी फार्म, साधूनगर, सेमल घाट व औदली घाट समेत अन्य कुछ गांवों के आसपास नदी के चौड़ाई का क्षेत्र काफी फैल चुका है। साथ ही इसमें गहरे-गहरे गड़ढ़े और खाईयां बन गई हैं। 20-25 साल पहले इस नदी में प्रकृति का अदभुत नजारा देखने को मिलता था और जगह-जगह इसमें दोनों तरफ खरीफ की फसलें-लौकी, करेला, भिंडी, टिंडा, ककडी, तरबूज, खरबूजा आदि उगाई जाती थी। वहीं फल एवं सब्जियों के बहुतायात उगाए जाने से क्षेत्र समेत दूर दराज के कई शहरों में इनका कारोबार किया जाता था।

इसी के साथ नदी का नीर जीवन दायक होता था, जो वर्तमान में काफी प्रदूशित हो चुका है। नदी इस बीच हजारों हैक्टेयर उपजाऊ भूमि के साथ दर्जनों गांवों के लिए खतरा बन चुकी है। सरकारी तौर पर इस समय इसमें खनन कार्य बंद है, लेकिन निजी तौर पर चोरी हुए खनन कार्य अभी भी जारी है। इस काले कारोबार का सही तखमीना नहीं लगाया गया, लेकिन अनुमान है कि रात दिन खनन कारोबार आए दिन माफिया लाखों के वारे न्यारे करते हैं। इसके बारे में ग्रामीणों का कहना है कि जगह-जगह अवैध अनियंत्रित खनन के कारण ही यह नदी अब से दस साल पहले कटान के साथ मिलकर दैविय आपदा में भारी तबाही का कारण बनी थी। इस यम इसमें माफियाओं द्वारा ग्रुप बनाकर खनन करवाया जा रहा है। आधा दर्जन करीब ग्रुप पूरी तरह सक्रिय बताए जा रहे हैं।

उधर प्रशासन अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के दहाडें मारते नहीं थक रहा है। सूत्रों की मानें तो ग्रुप संचालकों ने प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालय तक के पास भेदिये तैनात कर रखे हैं। इसलिए जब भी कोई अधिकारी उनकी गर्दन पकड़ने निकला है, पहले ही नदारद हो जाते हैं, हाथ कुछ नहीं आता। माफियाओं के मजबूत नेटवर्क के आगे पुलिस, राजस्व, परिवहन एवं वन विभाग ये चारों विभाग फेल हैं।

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