सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
गैरसैंण को कमिश्नरी के बजाय स्थाई राजधानी बनानी चाहिए। गैरसैंण कमिश्नरी बनाने से प्रशासनिक कार्य सुलझने के बजाय उलझने की संभावना है। यह बात उत्तराखंड लोक वाहिनी ने कही है। वाहिनी का आरोप है कि सरकार का गैरसैण को कमिश्नरी बनाने का लक्ष्य राजधानी के मसले को उलझाना है।
उत्तराखंड लोक वाहिनी की इस मुद्दे पर बैठक हुई। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पौढ़ी में पहले से ही गढ़वाल की कमिश्नरी है, वहां के कमिश्नर देहरादून में ही बैठते हैं। ऐसे में कमिश्नरी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा से कुमाऊं की पहचान है। वाहनी ने कहा है कि राज्य सरकार जिला विकास प्राधिकरणों पर स्पष्ट निर्णय नहीं ले पा रही है। सरकार जनहित में कार्य करने के बजाय जनहितों को लटका रही है। वक्ताओं ने गैरसैण को पूर्णकालिक राजधानी बनाने की मांग की। प्रदेश सरकार से मांग की कि सरकार को पिथौरागढ़ जैसे सीमान्त जनपदों के हितों का ध्यान रखना चाहिये। उन्होंने गैरसैण कमिश्नरी एक झुनझुना बताया। बैठक की अध्यक्षता जंग बहादुर थापा और संचालन पूरन चन्द्र तिवारी ने किया। बैठक में दयाकृष्ण काण्डपाल, जगत रौतेला, सुशीला धपोला, अजयमित्र बिष्ट, हरीश मेहता, हारिस मुहम्मद, रेवती बिष्ट आदि ने विचार व्यक्त किए।
ALMORA NEWS: उत्तराखंड लोक वाहिनी बोली— गैरसैंण कमिश्नरी महज झुनझुना
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