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शाबास एम्स : तीन साल बाद अपने पैरों पर चला राजस्थान का युवक, चिकित्सकों ने दिया नया जीवन

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देहरादून। एम्स ऋषिकेश के न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने राजस्थान निवासी एक युवक का जटिल न्यूरो ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है। न्यूरो की जटिल समस्या के चलते उक्त युवक पिछले तीन साल से अपने पैरों पर नहीं चल पाता था व उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ गया था, लिहाजा उसे घर के दो लोग उठाकर एक से दूसरी जगह ले जाते थे। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने जटिल केस की सफलतापूर्वक सर्जरी करने पर न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की सराहना की है। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान में मरीजों को वल्ड क्लास स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में संस्थान में माइक्रो न्यूरो सर्जिकल स्किल लैब की स्थापना की जाएगी, ताकि यहां पर पढ़ने वाले स्टूडेंट्स व युवा न्यूरो शल्य क्रिया चिकित्सक भी इस तरह की जटिल सर्जरी में दक्षता हासिल कर सकें व इसका लाभ मरीजों को मिल सके।

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जानकारी के मुताबिक राजस्थान के कंकोली गांव निवासी 27 वर्षीय युवक को न्यूरो संबंधी दिक्कतों के चलते पिछले तीन वर्षों से पांव से चलने फिरने में तकलीफ रहती थी। जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर आने जाने के लिए दो लोगों की सहायता की आवश्यकता होती थी। न्यूरो की जटिल बीमारी से ग्रसित युवक का सीने से नीचे का पूरा शरीर सुन्न पड़ गया था व उसके शरीर के निचले हिस्से में हरवक्त दर्द बना रहता था। जिस पर किसी भी दवा का कोई असर नहीं होता था। चिकित्सकों के अनुसार युवक का पिछले एक वर्ष से शौच व पेशाब का कंट्रोल भी खत्म हो गया था। युवक ने राजस्थान के कई अस्पतालों में अपना उपचार किया व चिकित्सकीय परामर्श लिया मगर कोई लाभ नहीं मिला। इसके बाद उक्त युवक ने जयपुर व दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में ​चिकित्सकों से अपना उपचार कराया मगर नतीजा सिफर रहा। युवक ने बताया कि उसने जहां भी न्यूरो सर्जन से परीक्षण कराया, सभी ने उसके ऑपरेशन में बड़ा रिस्क बताकर टाल दिया। साथ ही उसे बताया गया कि उसके पैरों में जीवनभर लकवे की शिकायत बनी रहेगी और वह कभी भी अपने पैरों पर नहीं चल पाएगा।

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सभी अस्पतालों से मायूस हो, थक-हारकर आखिरकार युवक ने अपने इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स की ओर रुख किया। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग में चिकित्सकों ने युवक का एमआरआई कराया,जिसमें मरीज की स्पाइनल कॉर्ड में गांठ पाई गई। जिसके बाद एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसके ऑपरेशन का निर्णय लिया। जटिल सर्जरी के बाद चिकित्सकों ने युवक की स्पाइनल कॉर्ड में बनी गांठ को निकाल दिया। एम्स में सफलतापूर्वक सर्जरी के बाद युवक 4 से 5 दिनों में हल्के सहारे के साथ अपने पैरों पर स्वयं चल पा रहा है, साथ ही उसके पेशाब का कंट्रोल भी आ गया है। विशेषज्ञों ने बताया कि जल्द ही युवक सामान्य जीवनयापन करने लगेगा। सफलतापूर्वक हाईरिस्क सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर राधेश्याम मित्तल, डा. रजनीश कुमार अरोड़ा, राजशेखर शामिल थे, साथ ही न्यूरो एनेस्थिसिया विभाग की टीम ने सहयोग किया।

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