सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
देशभर में किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए जा हरे आंदोलन का उत्तराखण्ड लोक वाहिनी ने समर्थन किया है। इसी उपलक्ष्य में वाहिनी ने यहां एक वर्चुअल संवाद आयोजित किया। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि नये नियमों से देश में खाद्यान्न सुरक्षा एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर वितरीत असर पड़ेगा और किसान की सुविधाएं छिन जाएंगी।
वक्ताओ ने कहा कि किसान सरकार से मांग कर रहे हैं कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करे, ताकि किसानो को लागत मूल् मिलने की उम्मीद जग सके। उन्होंने कहा कि आज कृर्षि उपज बेचने के लाभ सीमित हो गए। ऐसे में किसानों की उपज को बाजार नहीं मिल पाएगा। संवाद में कहा गया कि खरीद—फरोख्त निजि हाथों में देने का सीधा असर खाद्यान्न सुरक्षा व सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ेगा। इससे अब सरकार खाद्यान्न् के लिए निजि कम्पनियों पर निर्भर हो जायेगी। वाहनी नेताओ ने कहा कि अब तक देश मे आवश्यक वस्तु अधिनियम् के तहत जमाखोरी पर अंकुश लगा रहता था। अब यह केवल आपदाकाल में ही लागू होगा। ऐसे में जमाखोर कृत्रिम अभाव पैदा कर आम लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि सरकार को किसानों को उचित सुविधाएं देते हुए किसानों व आम जनता की सुविधाओं का प्रबंध करना चाहिए। इस वर्चुवल संवाद में वाहिनी नेता एड. जगत रौतेला, पूरन चंद्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, सुशीला धपोला, अजय मित्र बिष्ट, अजय मेहता, हरीश मेहता, दयाकृष्ण काण्डपाल आदि ने विचार रखे।
अल्मोड़ा न्यूज : अब संकट में पड़ेगी खाद्यान्न सुरक्षा और वितरण प्रणाली, वाहिनी का वर्चुअल संवाद
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